पंडित जी

कहा जाता है पंडित बहुत ज्ञानी होती है जिन्हें विशेष रूप से संस्कृत, हिंदू धर्मग्रंथों, वेदों की विद्या प्राप्त करने में कई वर्ष लग जाते है , मगर क्या हो जब कोई झट से पंडित बनना चाहता हो ! पढ़िए यह अकबर बीरबल के मज़ेदार किस्से की कहानी (Akbar Birbal ki Kahani) ।
एक बार की बात है जब सभा खत्म हो जाती है तो सभी दरबारी और शहंशाह अकबर साथ ही साथ बीरबल भी अपने कक्ष की तरफ जा रहे थे ।
तभी एक सिपाही बीरबल को रोक कर कहते है
सिपाही : आप से कोई मिलना चाहता है !
बीरबल : आप उन्हें कहे कल सुबह दरबार में मिले
सिपाही फिर बोलते हुए : बीरबल जी वो आप से अभी मिलना चाहते है ।
बीरबल : अच्छा ठीक है !
थोड़ी ही देर में एक व्यक्ति आता है , जिनका नाम नाथूराम था ,
बीरबल जी , मेरा नाम नाथूराम है , मेरी समस्या यह है कि में ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हु ,मुझे इस बात का खेद है कि मेने अपनी शिक्षा में ध्यान नहीं दिया , में चाहता हु कि समाज में सिर उठा के सम्मान से जीना चाहता हु , मगर शायद अब ऐसा नहीं होगा ,
बीरबल : नहीं ऐसा कुछ नहीं आप मेहनत कीजिए , आप में योग्यता है ! आप कुछ भी बन सकते है ।
नाथूराम : बीरबल जी, में पंडित बनना चाहता हु ,
बीरबल : यह तो अच्छी बात है , कुछ अच्छा करना हो तो आप कभी भी कर सकते है , आप अच्छे से विद्या प्राप्त कीजिए और कुछ वर्षों बाद आप पंडित बन जाएंगे !
नाथूराम : में इंतजार नहीं कर सकता अब इस उम्र में इतना नहीं पढ़ सकता में चाहता हु कि आप कोई ऐसा तरीका ढूंढें जिससे झट से आप मुझे पंडित बना दीजिए !
बीरबल ( मन ही मन ) : यह कैसा व्यक्ति है , बिना कुछ किए बगैर ही सब कुछ पाना चाहता है ,
बीरबल ने कुछ सोचा , और नाथूराम के कान में कुछ कहा !
जब बीरबल शहंशाह अकबर के कक्ष में आए तो शहंशाह ने पूछा कि क्या समस्या थी उन्हें ?
बीरबल ने पूरी बात शहंशाह अकबर को बताई और वह हंसने लगे तभी ,
शहंशाह अकबर : बीरबल हम बहुत जिज्ञासा में है कि आप कैसे इन्हें पंडित बनाएंगे ।
अब अगले दिन ,
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जब नाथूराम बाजार में कुछ खरीद रहा था तब ,
कुछ लोग नाथूराम को पंडित जी , पंडित जी कहने लगे और पूरे बाजार में शोर गोल करते है ,
नाथूराम बीरबल के कह अनुसार उनके पीछे डंडा ले कर भगाता है यह देख और लोग भी नाथूराम को पंडित जी , पंडित जी कहने लगते है !
अब कुछ हफ्तों बाद !

नाथूराम बीरबल से मिलने आते है ,
नाथूराम : बीरबल जी में चाहता हु कि आप सब कुछ पहले जैसा कर दीजिए !
अब मुझे समझ आ गया है सभी व्यक्ति मेरा मजाक बना रहे है और में मूर्ख समझ रहा था कि सब मेरा सामना कर रहे है ! जब की में एक मजाक का पात्र बन गया हु।
बीरबल ने कहा ठीक है लेकिन ध्यान रहे आपको क्या करना है ।
अब जब भी कोई व्यक्ति नाथूराम को पंडित जी कह कर बुलाता तो वह उन्हें नजरअंदाज कर देते और शांति पूर्वक वहां से गुजर जाते , और कुछ ही दिनों में सब पहले जैसा हो गया !
शहंशाह अकबर ने जब बीरबल से सवाल क्या की कैसे आपने नाथूराम की समस्या सुलझाई ?
जहांपनाह नाथूराम पंडित बनना चाहता था मगर बगैर विद्या और ज्ञान के तो मेने अपने कुछ लोगों को कहा कि इससे पंडित जी कह कर बुलाए और दूसरी तरह नाथूराम को कहा उनके पीछे डंडा ले कर भागे , जिससे और लोगों ने भी देखा और नाथूराम को पंडित जी , पंडित जी कह कर चिढ़ाने लगे ।
जल्द ही नाथूराम को एहसास हुआ कि यह लोग सिर्फ उनका मजाक बना रहे है न कि सम्मान कर रहे है तो नाथूराम फिर आए मेरे पास और इस बार मेने उन्हें शांत रहने को कहा क्योंकि जब हम किसी बात पर प्रतिक्रिया नहीं करते है तो सामने वाला समझ जाता है इसे कोई फायदा नहीं है, और धीर धीरे वह चिढ़ना या मजाक बनाना बंद कर देता है !
बीरबल : जहांपनाह ! इस बार नाथूराम समझ गया कि मेहनत और सफलता से जब हम कुछ बनते है तो हमारा सम्मान होता है ! ना कि ऐसे ही।
शहंशाह अकबर : कबीले तारीफ बीरबल , हमे नाज़ है आप हमारे सल्तनत का हिस्सा है !
यह कहानी यहां समाप्त होती है आशा है कि आपने कुछ सीखा होगा अच्छा यह है कि अगर आप कुछ करना चाहते है यह कुछ बनना चाहते है तो वह आप स्वयं कर सकते है आपके पास के लोग आपको सिर्फ सलाह ही दे सकते है तो अपने बल पे कुछ करे या कुछ बने नहीं तो नाथूराम की तरह आप बस एक मूर्ख बन सकते है और एक मजाक का पात्र बन जाएंगे बिना कुछ किए बगैर ।
धन्यवाद!
निष्कर्ष :
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