अकबर बीरबल की कहानियाँ: बुद्धि, चतुराई की अनमोल दास्तानें
Akbar Birbal Stories : न्याय की घंटी

सभी दरबार में बैठे हुए किस्से और कहानियां का आनंद ले रहे थे साथ ही एक मंत्री अपनी कहानी सभी व्यक्तियों को सुना रहा था सभी ध्यान केंद्रित कर सुन रहे थे , तभी एक मंत्री कहता है इस कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बंधेगा और किसी तरह से यह कहानी खत्म होती है और शहंशाह अकबर को घंटी वाला वाकया याद रहता है उन्होंने कहा
शहंशाह अकबर : क्यों न हम ऐसा करे महल के सामने एक बड़ी घंटी लगा दे जिससे जिस भी व्यक्ति को न्याय चाहिए वह उसे बजाए और हम समझ जाएंगे वह व्यक्ति न्याय चाहता है !
सभी दरबारी और साथ ही साथ बीरबल ने कहा : जहांपनाह ! आपका यह विचार बहुत ही उचित है , हम बिल्कुल ऐसा कर सकते है !
कुछ हफ्तों में ही न्याय की घंटी को महल के समाने लगा दिया गया और सभी को सूचित किया गया अगर आप सभी न्याय चाहते है तो महल के सामने वाली घंटी को बजाए जिससे हम समझेंगे कि आपको न्याय चाहिए और शहंशाह अकबर के साथ बीरबल जी आप सभी की समस्या का हल का जवाब देंगे !
कुछ दिनों तक कई लोग आए न्याय के लिए , एक किसान जिसकी पूरी फसल खराब हो गई और उसके पास अब पैसे नहीं अपने कर्जदारों को देने के लिए , कर्जदारों ने कई बार तंग क्या और उसको उसके घर से निकल दिया गया ,
जो कि साफ गलत था ,
हालांकि,
बीरबल ने कहां : कर्जदारों को आप इन्हें समय दीजिए यह अवश्य ही आपका पैसे लौटा देंगे ,
शहंशाह अकबर ने 100 मुद्रा दी उस किसान को और कहा आप दोबारा से शुरु करे , दोबारा खेती करे और इनका कर्ज चुकाए।
बीरबल की सलाह और शहंशाह अकबर की सहायता से से उस किसान ने दोबारा खेती शुरू की और इस बार उसकी फसल बहुत अच्छी हुई , और उसने सारा कर्ज अदा कर दी और मेहनत लगन से फसलों का अच्छे से ख्याल रखने लगा !
इसी तरफ कई और व्यक्ति आए न्याय के लिए उसके घर में चोरी हुई थी , तो किसी की साथ चालसाज़ की गई थी सभी व्यक्तियों को सहायता की गई , दोषी को सजा दी गई ।
लेकिन,
एक दिन शहंशाह अकबर अपने दरबार में बैठे थे कि महल के मुख्य द्वार पर एक अजीब घटना हुई।
उस दिन घंटी बिना किसी के छुए अपने-आप बज उठी। पहरेदार घबरा गए और दरबार में खबर पहुँची। अकबर ने तुरंत आदेश दिया, “देखो कौन न्याय चाहता है”

जब सैनिक बाहर गए, तो उन्होंने देखा कि एक दुबली-पतली बूढ़ी गाय घंटी के नीचे खड़ी है और उसके सींग घंटी से टकरा रहे हैं।
दरबार में चर्चा शुरू हुई। कुछ दरबारी हँसने लगे।
“जहाँपनाह, अब गाय भी न्याय माँगने लगी!”
लेकिन शहंशाह अकबर गंभीर थे। उन्होंने कहा, “यदि कोई प्राणी पीड़ा में है, तो हमें उसकी सहायता करनी चाहिए।”
बीरबल आगे आए, उन्होंने गाय को ध्यान से देखा और उसके शरीर पर चोट के निशान पाए।
बीरबल : “जहाँपनाह,” , “यह गाय स्वयं नहीं आई होगी। जरूर इसके साथ अन्याय हुआ है।”
उन्होंने आदेश दिया कि आसपास के गाँवों से पूछताछ की जाए। थोड़ी देर बाद एक किसान लाया गया। वह घबराया हुआ था।
बीरबल ने पूछा, “यह गाय तुम्हारी है?”
किसान बोला, “जी हाँ, मगर यह बूढ़ी है और अब दूध नहीं देती। इसलिए मैंने इसे घर से निकाल दिया।”
बीरबल क्रोधित हुए कहा :
“तो तुमने इसे निकाल दिया, और यह न्याय माँगने दरबार पहुँच गई।”
किसान बोला, “महाराज, मैं गरीब हूँ। मैं इसका पालन कैसे करूँ?”
बीरबल ने शांत स्वर में कहा, “जब यह जवान थी, तब इसने तुम्हें दूध दिया, तुम्हारे बच्चों को पाला। अब जब इसे सहारे की जरूरत है, तुमने इसे छोड़ दिया। यह अन्याय है।”
शहंशाह अकबर ने किसान को आदेश दिया कि वह गाय को वापस ले जाए और उसकी देखभाल करे। साथ ही, उसे कुछ अनाज और धन भी दिया ताकि वह गाय को पाल सके।
शहंशाह अकबर बोले, “बीरबल, तुमने केवल न्याय नहीं किया, बल्कि हमें करुणा का पाठ भी पढ़ाया।”
बीरबल झुककर बोले, “जहाँपनाह, सच्चा न्याय वही है जिसमें दया भी शामिल हो।”
कहानी से सीख : हमे उनका साथ जरूर देना चाहिए जो हमारी बुरी हालत में हमे सहायता करते है , जिस तरह उस किसान ने उस गाय के बूढ़ी होने पे निकाल दिया यह गलत था , जब वह गया जवान थी तो उसने ही उस किसान की सहायता की इसी तरह उसके बूढ़े होने पड़ हमारी ही जिम्मेदारी बनती है कि हम उसका ख्याल रखे !
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निष्कर्ष :
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