Akbar Birbal ke Kisse

Akbar Birbal Ke Kisse : स्वर्ग की यात्रा | birbal ke kisse

इस कहानी के पात्र : characters of akbar birbal ke kisse

  • शहंशाह अकबर
  • बीरबल
  • वजीर – ए- अब्दुल्लाह
  • योगिराज निरंजन बाबा
  • नाई
  • कुछ दरबारी

शहंशाह अकबर बीरबल को बहुत पसंद करने लगे थे शहंशाह अकबर बीरबल से प्रसन्न रहते बाकी दरबारियों बीरबल की बुधिमत्ती से जलने लगे थे वजीर- ए- अब्दुल्लाह से भी यह सब कुछ सहन नही हो पा रहा था । क्योंकि जब से बीरबल ने नौ रत्नों में अपनी जगह ली थी , बीरबल के किस्से कि सब लोग बातें करते थे |

वजीर- ए – अब्दुल्लाह के साथ शहंशाह अकबर ज्यादा समय नहीं बीता पाते थे ।वजीर ए अब्दुल्लाह और कुछ दरबारी मिल जुल के बीरबल के खिलाफ़ एक योजना बनाते है और इस योजना में वह एक नाई को भी शामिल करते है ।

अब अकबर बीरबल की कहानी छोटी सी ( akbar birbal ke kisse ) की इस कहानी में आगे बढ़ते है

akbar birbal ke kisse

एक सुबह शाही नाई शहंशाह अकबर की हाजम बना रहे थे तो वह उनकी तारीफ करते हुए कहता है

नाई : जहांपाहना आप सभी का बहुत ख्याल रखते है अपने से बड़े , अपनी सल्तनत के गरीब , लाचार , बच्चे आदि ।

अकबर : शुक्रिया !

नाई: लेकिन , जहांपनाह

अकबर : लेकिन , लेकिन किया , किया कोई है जिससे हम भूल रहे है ? या कोई ऐसा है जिससे हम नजरंदाज कर रहे है ?

नाई: जहांपनाह गुस्ताखी माफ ! मगर अपने कभी सोचा है अपने बड़े बुजुर्ग मतलब अपने पूर्वजों के बारे में जो दुनिया छोड़ स्वर्ग चले गए है ।

अकबर : मगर हम तो उनका ख्याल रखते है उनके हक में हम दुआ करते है उनके याद में हमने शाही मकबरे बनवाए है ।

नाई : जहांपनाह आपको किसी को स्वर्ग भेजना चाहिए जो आपको बताए की आपके पूर्वज किस तरह रह रहे है और उनको किस चीज की दिक्कत तोह नहीं।

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अकबर : यह किया कह रहे हो तुम , तुम्हारा दिमाग तो खराब नही हो गया कोई स्वर्ग जा के कैसे कोई वापस आ सकता है ?

नाई : जहांपनाह में सच कह रहा हु , स्वर्ग की यात्रा कर के वापस आया जा सकता है में एक सिद्ध योगीबाबा को जनता हु जो व्यक्ति को स्वर्ग भेज सकते है और उन्हें वह वापस भी ला सकते है , और वजीर – ए – अब्दुल्लाह भी उन से तशरीफ रखते है ।

आप चाहे तो वजीर – ए – अब्दुल्लाह से कह कर योगी बाबा को आप बुला सकते है ।अगले दिन दरबार में , वजीर- ए- अब्दुल्लाह योगी बाबा को ले कर आते है

अकबर : वजीर – ए – अब्दुल्लाह किया आपने योगी बाबा को बुलाया ?

अब्दुल्लाह : जी जहांपहना वह दरबार के बाहर खड़े है ।आपकी इजाजत हो तो उन्हे बुलाए ?

अकबर : वजीर- ए- अब्दुल्लाह उन्हे बुलाया जा योगिराज निरंजन बाबा दरबार में हाजिर होते है

योगिराज बाबा : अलख निरंजन , जहांपनाह मेरा नाम योगिराज निरंजन है ।

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अकबर : हमने सुना है आप किसी को भी स्वर्ग भेज सकते और वह वापस आ सकता है ।

योगिराज बाबा : जी जहांपनाह , मेने ऐसी विद्या सीखी है में यह कर सकता हु ,

अकबर : हम यह जानना चाहते है हमारे पूर्वजों को स्वर्ग में कोई जरूरत तो नही हम उनके बारे में जानना चाहता है वह सभी खुशी से रह रहे है ना ?

योगिराज बाबा : जी जहांपनाह , आप किस ऐश भरोसेमंद व्यक्ति को भेज सकते है जो स्वर्ग के मोह में न फसे आपके पूर्वजों की कोई जरूरत है या नही ऐसा सूचना आपको दे सकते है ।

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अब्दुल्लाह : जहांपनाह दरबारियों में सब से बुद्धिमती बीरबल के पास और साथ ही साथ वह भरोसेमंद भी है अकबर : बीरबल ! किया आप स्वर्ग जायेंगे हमारे पूर्वजों के पास ?

बीरबल : जी जहांपनाह में स्वर्ग जाऊंगा ।

अब बीरबल योगिराज निरंजन से कुछ सवाल पूछते है ।

बीरबल : आप मुझे स्वर्ग कैसे भेजेंगे ?

योगिराज बाबा : में एक पवित्र आग जलूंगा जिसमे आपको प्रवेश करना होगा यह क्रिया हम कही भी कर सकते है मगर हम इसे नदी के घाट के पास करेंगे जिससे आपको दिमाग में शांति बनी रहेगी !

बीरबल : मुझे स्वर्ग से आने में कितना समय लगेगा ?

योगिराज बाबा : अगर आप स्वर्ग के मोह में ना आए तो आप दो महीनों में आ जायेंगे

बीरबल : जहांपनाह इस कार्य में समय लगेगा और में अपने परिवार से दूर रहूंगा आप मुझे चार – पांच दिन के मोहलत दे ।

अकबर : ठीक है , योगिराज आप बीरबल की स्वर्ग यात्रा ( birbal ki Swarg yatra) की तयारी पांच दिन बाद संपन्न करे ।

योगिराज बाबा : जी जहांपनाह ।अब पांच दिन बाद ,बीरबल को स्वर्ग जाने के लिए ले जाया जाता है पवित्र आग जलाई जाती है बीरबल के माथे पर तिलक लगाते है और उनकी थोड़ी पूजा की जाती है , योगिबाबा और बीरबल को चित्त हो जाने को कहते है ।

अकबर : योगिनिरंजन हमे आप पर भरोसा है मगर सच में बीरबल स्वर्ग यात्रा ( birbal Swarg yatra) कर के आ जायेंगे ना ?

योगिराज : जी जहांपन्हा , आप चिंतित ना हो ।

बीरबल : अलविदा! जहांपनाह , अलविदा

अकबर : बीरबल हम आपको याद करेंगे । आप कोशिश करें जल्दी लौटने की

बीरबल : जी जहांपनाह ! में जल्दी लौट कर आऊंगा ।अब दो महीने गुजरने के बाद ,शहंशाह अकबर बहुत चिंतित हो गए बीरबल की कोई सूचना नहीं थी ,एक दिन दरबार में

अब्दुल्लाह : योगिराज बाबा ने यह भी कहा था कि स्वर्ग के मोह में फस गए तो नहीं आ सकते जहांपनहा यह भी हो सकता है बीरबल स्वर्ग के मोह में आ गए होंगे ।

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अकबर : नही ऐसा नहीं हो सकता , बीरबल ऐश नहीं कर सकते हमे उन पर पूरा भरोसा है ।

शाम के समय फिर बीरबल की स्वर्ग यात्रा ( birbal ki Swarg yatra) की बातें कर रहें थे ,

तभी बीरबल दरबार में आते है ! सभी दरबारी और साथ ही साथ वजीर- ए – अब्दुल्लाह देख के चौक जाते है ।बीरबल : में आ गया जहांपनाह , में आ गया

अकबर : खुशामदीद ! खुशामदीद! वोह! बीरबल हमे तुम पर पूरा भरोसा था तुम जरूर आओगे ।

अकबर : बताओ हमारे पूर्वजों को कोई जरूरत तो नही वह सभी ठीक तो है ना ? उन्हे किसी चीज़ की जरूरत तो नही ?

बीरबल : जी जहांपनाह , वह सभी ठीक उन्हे किसी चीज़ की जरूरत नही तभी

अकबर ( बीरबल की तरफ ध्यान देते हुए ) : बीरबल यह तुम्हारे बाल इतने बड़े कैसे हो गए ? और दाढ़ी भी ! बीरबल : जी जहांपनाह मेरे बाल ही नहीं स्वर्ग में हर किसी के बाल इतने लंबे है स्वर्ग में सबकुछ है मगर कोई नाई नहीं है जो उनके हाजम बना सके ,

अकबर : हम अभी अपने शाही नाई को स्वर्ग भेजने की तयारी करवाते है । नाई और योगिराज दोनो यही मेहमान बन कर रह रहे है ।

अकबर : वजीर- ए – अब्दुल्लाह को कहते है उन योगीबाबा और नाई को बुलाया जाए ।

अकबर : योगिराज स्वर्ग में नाई की जरूरत है , नाई को स्वर्ग भेजने की क्रिया शुरू की जाए

नाई ( घुटने के बाल हो कर ) : गुस्ताखी माफ जहांपनाह , माफ यह सब एक साजिश थी बीरबल को स्वर्ग भेजने की इसमें वजीर- ए- अब्दुल्लाह भी शामिल है । वह बीरबल की शोहरत से भी जलते है इसीलिए उन्हें अपने रास्ते से हटाना चाहते है मुझे नही पता बीरबल कैसे बच गए उस आग से मगर में नही बचूंगा ।

अकबर : इतनी बड़ी साजिश बीरबल के खिलाफ ! सिपाहियों इन्हे बंदी बना लो ।वजीर – ए – अब्दुल्लाह हम चाहें तो तुम्हे हम अभी फांसी की सजा दे सकते है मगर तुमने हमारी काफी हिफाजत की इसीलिए हम तुम्हे देश निकाला देते है

अब्दुल्लाह : जहांपनाह माफ़ करे , इस दफा हमे माफ करे अगली बार से यह नहीं होगा ।

अकबर : सिपाहियों इन्हें सरहद के बाहर छोड़ दो और फिर कभी अपनी शक्ल हमे मत देखना ।

कुछ समय पश्चात् ,

अकबर : वोह! बीरबल मेरे बुद्धिमान दोस्त तुम्हे इनकी साजिश का पता कैसे चला ?

बीरबल : जहांपनाह जब मेंने योगिराज से पूछा की आप मुझे कैसे स्वर्ग भेजेंगे तो उन्हे कहा आग से जला के ,में तभी समझ गया जहांपनाह दाल में कुछ काला है ,

मेने जो आप से पांच दिन के मोहलत ली थी उसमे मेने एक सुरंग बनाई जहां पर वह मुझे जलाने वाले थे वहां से मेने अपने घर तक एक सुरंग बनाई और जैसे ही योगिराज मुझे उस आग में प्रवेश करने को कहां मेने देखा आग से धुवां आस पास फैल गया था मेने किसी के नजर में ना आ के सुरंग का दरवाजा खोल के सुरंग में चला गया और सुरंग के जरिए अपने घर पहुंच गया और दो महीने तक में अपने घर में ही रहा ।

मुझे यह भी पता था जहांपनाह इसमें सब से कमजोर कड़ी वह नाई है इसीलिए में चाहता था वह अपना इल्जाम खुद कबूल करे इसीलिए मेने अपने बाल और दाढ़ी बढ़ा ली ।अकबर : वोह! बीरबल एक तुम हो ऐसा कर सकते मेरे शातिर दोस्त , नहीं तो कोन स्वर्ग के यात्रा कर के वापस आ सकता है ,

दोनों साथ में हंसते है

बीरबल : जी जहांपनाह !

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कहानी से सिख : Moral of the Akbar birbal ke kisse

इस कहानी से हमे दो सिख मिलते है – Akbar birbal ke kisse

1 ) जैसे वजीर- ए – अब्दुल्लाह ने दरबारियों और नाई के साथ मिल के बीरबल के लिए जो गड्ढा खोदा था वह खुद उसी गड्ढा में गिर गए जैसा इस कहानी में हुआ सभी को बंदी बना लिया गया और अब्दुल्लाह को देश निकाल दिया गया अर्थात् बुरे काम का बुरा अंजाम होता है ।

2 ) अपनी सूझ बूझ से हम बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकल सकते है , हालांकि हम आज के समय इंटरनेट के दुनिया में खो गए है और छोटी सी समस्या को लेकर रोते रहते है ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ( FAQs) | Akbar birbal ke kisse

बीरबल ने स्वर्ग की अपनी यात्रा की तयारी कैसे की ?

बीरबल ने अपनी सूझ बूझ से आने वाली समस्या का अंदाजा लगाया था , उन्होंने जो पांच दिन के मोहलत ली थी उसमे उन्होंने एक सुरंग बनाई जहां पर योगिराज बाबा बीरबल को जलाने वाले थे वहां से बीरबल ने अपने घर तक एक सुरंग बनाई और जैसे ही योगिराज बाबा ने उस आग में प्रवेश करने को कहां आग की वज़ह से धुवां जो आसपास फैला गया था उन्होंने किसी के नजर में ना आ कर कर सुरंग का दरवाजा खोल के सुरंग में चले गए और सुरंग के जरिए अपने घर पहुंच गए और दो महीने तक में अपने घर में ही रहे ।

निष्कर्ष ( conclusion) : Akbar Birbal Ke Kisse

आशा करता हु आपको यह अकबर बीरबल की कहानी छोटी सी अच्छी लगी हो ” Akbar birbal ke kisse” से हम यह भी सीखते है की एक सही निर्णय जिंदगी की सही रहा पर ले जाता है , Akbar Birbal Ke Kisse :स्वर्ग की यात्रा से सिखा अपनी सूझ बूझ से हम बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकल सकते है , हालांकि हम आज के समय इंटरनेट के दुनिया में खो गए है और छोटी सी समस्या को लेकर रोते रहते है ।Akbar birbal ke kisse पढ़े हमारी वेबसाइट पे बिलकुल फ्री में .

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