अधूरी कोशिश नहीं, आत्मविश्वास की शुरुआत
क्या आप भी कभी , किसी काम को शुरू करने से पहले ही, हार मान ली है ? शिवम की जिंदगी की कहानी एक प्रयास और नई शुरुआत | Hindi Inspirational Story भी कुछ ऐसी ही है , उसके अंदर छिपा आत्म-संदेह उसे हर पल ये एहसास दिलाता कि वो चाहे कितनी भी मेहनत कर ले, वो ‘परिपूर्ण‘ (perfect) नहीं हो सकता। इस डर ने उसे कभी अपना सर्वश्रेष्ठ काम करने ही नहीं दिया। वह कोई भी काम शुरू करने से पहले ही हार जाता है, लेकिन जब वह अपनी मां की सीख ध्यान रख काम करता है, तो परिणाम कुछ और होता चलिए बिना देर किए शुरू करते है ” एक प्रयास और नई शुरुआत | Hindi Inspirational Story ” |
एक प्रयास और नई शुरुआत | Hindi Inspirational Story

एक छोटे से स्कूल में सभी बच्चे और शिक्षक एक जगह एकत्रित हुए है ।
कुछ बच्चे एक – एक कर के स्टेज ( stage) पे जा रहे है और भाषण दे रहे है ।
यह भाषण श्री डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर जी की जयंती पे दी जा रही है।
सभी बच्चे अच्छी तरह अपना भाषण तैयार कर के आए है , मगर कुछ देर में एक बच्चे का नाम पुकारा जाता है , क्योंकि अब उसकी बारी थी ।
शिक्षको ने आवाज दी , शिवम ! ,
शिवम अब आपकी बारी है ।
शिवम डरा हुआ था , उसके हाथ में भाषण देने की पर्ची तो थी । मगर वह घबराया हुआ था ।
उसके दोस्तों ने शिवम का हौसला बढ़ाया ।
शिवम ने हिम्मत की और स्टेज ( stage) पे चढ़ा |
वह, वहा से देख रहा था कि, सभी शिक्षक और बच्चे उसे ही देख रहे है ।
उसने भाषण देना शुरू किया और कहा : श्री डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश में हुआ था , उसे अचानक संदेह हुआ कि वह गलत तो नहीं बोल रहा है उसने पर्ची निकाली , उसके हाथ कप – कांपने लगे मगर उसने पढ़ना शुरू किया । ” श्री डॉ. भीमराव आंबेडकर जी ” , श्री डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश में हुआ था , वह एक भारतीय राजनीतिक नेता थे , जिन्होंने भारत के संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई , उन्हें भारत संविधान का जनक भी कहा जाता जाता है ।
इस तरह भाषण के दौरान बहुत डग मंगाया वह , एक ही लाइन को दो- दो बार दोहराता उसे यह संदेह था वह गलत तो नहीं बोल रहा है और एक लाइन बोलने के बाद वह रुक जाता फिर अपना भाषण देता । उसने भाषण तो सही दिया मगर उसके अंदर के संदेह ने उसके इस भाषण को एक खराब प्रदर्शन में जोड़ दिया था ।
शिक्षक हौसला बढ़ाते हुए कहा शिवम अच्छा भाषण दिया तुमने ।
शिवम ने कुछ नहीं बोला , कुछ देर बाद छुट्टी हुई और वह घर चला गया ।
मां ने पूछा : बेटा कैसा गया आज का दिन ?
शिवम : अच्छा था , में स्टेज ( satge) पे चढ़ा और भाषण देना शुरू किया मगर में एक ही लाइन को दो – दो बार दोहराता गया मुझे संदेह था कि में गलत तो नहीं बोल रहा हु , मुझे डर लग रहा था ।
मां : कोई बात नहीं , आप कोशिश करना अगली बार अच्छा करने की ।
अगले हफ्ते स्कूल में चित्रकला की प्रतियोगिता ( Drawing Competition) होने वाली है, सभी उत्सुक है कि मुझे अच्छा करना , मुझे अच्छा करना है ।
सभी बच्चे और उनके माता – पिता को इस बार स्कूल में बुलाया गया था ।
सभी माता – पिता समय पड़ स्कूल पहुंचते है ,
शिक्षक ऐलान करते है इस प्रतियोगिता में जो छात्र अच्छा करेगा उसे एक लंच बॉक्स ( lunch box ) उपहार के तौर पे दिया जाएगा ।
सभी बच्चे को लालसा हुई विजेता बनने की बनाना है ।
शिवम , कागज़ पे लाइन खींचना शुरू करता है और लाइन टेढ़ी हो जाती है , वह थोड़ा और प्रयास करता है मगर लाइन फिर टेढ़ी हो जाती है ।
वह अपने मां से पूछता है, मां यह लाइन सीधी नहीं बन रही है ,
मां : बेटा आप स्केल ( scale) का इस्तेमाल करो इससे हो जाएगा ।
शिवम : ठीक है मां ,
वह स्केल ( scale ) का इस्तेमाल करता है मगर फिर लाइन टेढ़ी हो जाती है, क्योंकि शिवम के हाथ कप – कांपने की वजह से लाइन टेढ़ी हो जाती है , उसे फिर संदेह होता है क्या में सही कर रहा ?
वह थोड़ा और प्रयास करता है मगर वह लाइन खींचने के आगे बढ़ ही नहीं पा रहा था ।
वह निराश हो कर कागज ही फाड़ देता है ।
शिवम की मां जब थोड़ी देर में आती है तो पूछती है आपने बना लिया चित्र ?
शिवम : नहीं लाइन सही से नहीं खींच पा रहा हु में ।
शिवम ( निराश हो कर बोला) : मां मेरे से नहीं हो रहा है , में नहीं कर पाऊंगा !
शिवम की मां ने कहा :
शिवम जब आप छोटे थे और जब चलना शुरू किया था , तो एक कदम आगे बढ़ाते थे और धप से गिर जाते थे। मगर आप फिर उठे और फिर गिरे । शायद सौ से भी अधिक बार गिरे हो आप । लेकिन अगर आप यह सोच कर बैठ जाते कि में तो ज़िंदगी भर चल नहीं सकता तो किया आप आज चल पाते ? तुम जब भी गिरते थे तो मुस्कुराते थे बेटा और फिर से कोशिश करते थे । और आज देखो, आज तुम न सिर्फ चलते हो, बल्कि तेज़ दौड़ते भी हो।
आप इस वक्त इसलिए डर रहे हो कुछ भी करने से पहले की में हार जाऊंगा तो किया होगा , मगर जब आप छोटे थे तो आपको इस शब्द का मतलब आपको पता भी नहीं था बेटा , तो आप हार को भूल कर बस सीखने और बढ़ने में ध्यान दो ।
बेटा, खुद पर संदेह करना और जल्दबाजी करना,
सही नहीं होता है , असफलता तो हमें सिखाती है, लेकिन आत्म-संदेह हमें कोशिश करने से पहले ही हरा देती है ।
शिवम यह सारी बातें ध्यान से सुन रहा था , तभी शिक्षक ने ऐलान किया कि अब अंधा घंटा समय है सिर्फ प्रतियोगिता समाप्त होने में ।
शिवम ने बोला : मां में समझ गया हु , में कहां पे गलतियां कर रहा हु , अब में कर लूंगा ।
उसने पेंसिल उठाई और काग़ज़ पे लाइन खींचने लगा , जब उसका हाथ कांपता, तो वह खुद से कहता—”कोई बात नहीं, मैं सीख रहा हूँ।“
धीरे-धीरे, पन्ने पर एक खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य उभरने लगा।
शिवम को एहसास हुआ कि असली ख़ुशी काम को करने में होनी चाहिए ना कि में सही कर रहा हु कि नहीं , यह संदेह करने में | बार – बार खुद से संदेह करने का परिणाम केवल असफलता ही होती है।
उसने अपनी चित्र पूरी की , वह इस प्रतियोगिता में जीत तो नहीं पाया मगर उसने एक सबक सिखा , मुझे अपने आप पर संदेह नहीं करना चाहिए और में गलतियां कर रहा हु तो मुझे उससे सीखना है ।
और उन गलतियों को सुधार कैसे करना यही सोचना है।

कहानी से सीख :
इस कहानी से हमें दो बड़ी बातें सीखने को मिलती हैं:
1.खुद पर विश्वास रखें: अगर आप खुद पर शक करेंगे, तो आप अपनी शक्तियों को खुद ही कैद कर लेंगे। डर को अपनी खुशियां मत छीनने दीजिए।
2.धीरज (Patience) ही ताकत है: कोई भी बड़ी सफलता रातों-रात नहीं मिलती। जैसे बच्चा गिर-गिरकर चलना सीखता है, वैसे ही हर छोटी कोशिश आपको आपकी मंजिल के करीब ले जाती है, प्रयास करते रहे |
निष्कर्ष :
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