3 Inspirational Stories for Kids: प्रेरणा से भरी कहानियाँ

Hindi Inspirational Stories

Inspirational Stories for Kids बच्चों के लिए प्रेरणादायक कहानियों का संग्रह है, जो उनके व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और कल्पनाशक्ति को बढ़ाने में सहायता करता है। ये रोचक और शिक्षाप्रद कहानियाँ बच्चों को साहस, दया, मेहनत और सकारात्मक सोच जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों को सरल तरीके से समझाती हैं। हर कहानी में ऐसे पात्र और घटनाएँ होती हैं जो बच्चों को बड़े सपने देखने, चुनौतियों का सामना करने और अपनी क्षमता पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करती हैं। ये हिंदी कहानियाँ Real Life Hindi Stories पर है जो , स्कूल गतिविधियों और पारिवारिक समय के लिए बिल्कुल उपयुक्त हैं और बच्चों में सीखने का उत्साह जगाती हैं, चलिए साथ पढ़ते है यह Hindi Inspirational stories .

1.कागज़ की नाव और छोटी सी उम्मीद

Hindi Inspirational Stories for Kids
कागज़ की नाव – Inspirational Stories for Kids

एक छोटे से कस्बे में आरव नाम का 7 साल का लड़का रहता था। आरव को कागज़ की नाव बनाना बहुत पसंद था। बारिश हो या धूप, वह ढेर सारे नाव बनाकर पानी में चलाया करता था। उसकी माँ हँसकर कहतीं, “एक दिन तू जरूर कोई बड़ी नाव बनाएगा।” आरव भी यही सपना देखता था।

लेकिन उसके कस्बे में अक्सर पानी की कमी रहती थी। कभी-कभी तो महीनों तक बारिश नहीं होती थी। लोग परेशान रहते, और आरव अपनी सूखी नदी के किनारे बैठकर कल्पना करता कि काश पानी होता, तो वह अपनी नावें एक जगह से दूसरे जगह जाते हुए देख पाता।

एक दिन स्कूल में घोषणा हुई कि “मेरे सपने की नाव” विषय पर प्रतियोगिता है। बच्चों को कागज़ से एक खास नाव बनानी है। विजेता को पुरस्कृत किया जाएगा।

सब बच्चे बहुत उत्साहित थे। कुछ ने रंगीन कागज़ खरीदे, कुछ ने मोटे गत्ते का इस्तेमाल किया। लेकिन आरव के पास खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। वह घर आया तो उदास बैठा रहा।

“क्या हुआ बेटा?” माँ ने पूछा,
आरव ने बताया, “माँ, मेरे पास रंगीन कागज़ नहीं हैं। मैं कैसे बनाऊँगा खास नाव?”

माँ ने मुस्कुराते हुए अपनी पुरानी नोटबुक निकाली।
“ये लो, ये भी कागज़ ही हैं। अगर इरादा अच्छा हो, तो पुराना कागज़ भी सुंदर नाव बना सकता है।”

आरव खुश हो गया। उसने रातभर बैठकर अपनी नोटबुक के पन्नों से नाव बनाई—साधारण, सादी, पर बहुत मजबूत और खूबसूरत। उसने उन पर छोटे-छोटे सपनों के चित्र भी बनाए: बड़ा समुद्र, उड़ते पक्षी, और एक बच्चा जो दूर तक यात्रा कर रहा है।

अगले दिन स्कूल में हर कोई अपनी चमकदार नाव लेकर आया। कुछ बच्चों ने रंग-बिरंगे डिज़ाइन बनाए जो काफी आकर्षित थे। आरव की नाव साधारण लग रही थी। बच्चे हँसने लगे।

“ये देखो! नोटबुक से बनी नाव!”
“इसके तो रंग भी नहीं हैं!”

आरव चुप रहा, लेकिन उसका दिल थोड़ा दुखा।

जब निर्णायक आए, तो उन्होंने एक-एक नाव की जांच की। रंग, डिजाइन, मजबूती—सब देखा। जब वे आरव की नाव तक पहुँचे, तो रुके।

“ये किसने बनाई है?” उन्होंने पूछा।
आरव आगे आया।
“सर, मैंने।”

निर्णायक ने नाव को हाथ में लेकर पलटा।
उन्होंने देखा कि हर पन्ने पर सपनों की छोटी-छोटी तस्वीरें उकेरी थीं, जो किसी भी चमकदार कागज़ से ज्यादा सुंदर थीं।

तुम्हारी नाव में सिर्फ कागज़ नहीं… दिल भी लगा है” निर्णायक बोले।

लेकिन अचानक तेज हवा चली और मेज पर रखी नावें उड़कर गिरने लगीं। लगभग सभी चमकदार नावें पानी से भरे छोटे टब में गिरते ही फट गईं, गीली होकर टूट गईं। लेकिन आरव की नोटबुक वाली नाव… वह टब में गिरकर तैरती रही! क्योंकि उसने उसे मोटा और मजबूत बनाया था।

पूरा स्कूल हैरान था।

निर्णायक ने कहा,
“विजेता है—आरव!”

सब बच्चे चौंक गए। आरव की आँखें खुशी से चमक उठीं।

“लेकिन… ये तो पुराना कागज़ है!” एक बच्चा बोला।
निर्णायक मुस्कुराए।
“पुराना कागज़ हो सकता है, लेकिन मेहनत और हिम्मत नई थी। और यही मायने रखता है।”

उस दिन स्कूल में पहला इनाम आरव को मिला—एक बड़ा रंगीन कागज़ों का सेट और एक छोटी किताब: बड़े सपने छोटे कदमों से शुरू होते हैं

आरव अपनी नाव लेकर घर गया। माँ ने उसे गले से लगा लिया।

उस दिन आरव ने सीखा कि चमक-दमक नहीं, इरादा महत्वपूर्ण है। अगर मन में विश्वास हो, तो कागज़ का एक छोटा सा पन्ना भी सपनों को तैराकर आगे ले जा सकता है।

कहानी से सीख : किसी भी काम की सफलता सामग्री पर नहीं, मेहनत और विश्वास पर निर्भर करती है।

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2.छोटा बादल और बड़ी हिम्मत

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बादल – Inspirational Stories for Kids

आकाश में बहुत-से बादल तैरते थे—कुछ बड़े, कुछ छोटे, कुछ चमकीले और कुछ बहुत गहरे। उन सबके बीच एक बहुत छोटा-सा बादल था, जिसका नाम था नीलू। नीलू बाकी बादलों की तरह बड़ा और भारी नहीं था। वह हल्का-फुल्का, फूला-फूला, और बहुत ही प्यारा था। लेकिन इस वजह से बड़े बादल अक्सर उसका मज़ाक उड़ाते।

“अरे नीलू! तू कितना छोटा है!” एक बड़ा बादल हँसते हुए कहता।
“तेरे अंदर तो एक गिलास पानी भी नहीं होगा!” दूसरा बादल चिढ़ाता।
नीलू चुप रहता। उसे बुरा लगता, पर वह जानता था कि वह जैसा है, वैसा ही ठीक है।

एक दिन सूरज बहुत तेज़ चमक रहा था। धरती पर गर्मी बढ़ती जा रही थी। खेतों में खड़ी फसलें झुलस रही थीं। गाँव के लोग आसमान की ओर देख-देखकर बारिश की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन आसमान में सिर्फ कुछ दूर-दूर फैले बादल थे।

सबसे बड़े बादल ने कहा, “आज तो हम आराम करेंगे, बहुत गर्मी है।”
दूसरा बोला, “मैं तो अभी बारिश नहीं बरसाऊँगा, मेरी इच्छा नहीं!”

नीलू यह सब सुन रहा था। उसे लगा कि गाँव वालों को बारिश की बहुत जरूरत है। बच्चे भी गर्मी से बेहाल होकर पेड़ों की छाया में बैठे थे। गायें-पशु पानी की तलाश में भटक रहे थे।

नीलू ने सोचा, क्या मैं कुछ कर सकता हूँ? मैं छोटा हूँ, पर कोशिश तो कर सकता हूँ।

वह धीरे-धीरे अपने अंदर जितनी भी नमी थी, उसे इकठ्ठा करने लगा। उसने आस-पास की हवा से भी थोड़ा-थोड़ा जल वाष्प खींच लिया। कोशिश बहुत कठिन थी—क्योंकि वह छोटा था। लेकिन उसके मन में हिम्मत थी।

फिर नीलू थोड़ा और ऊपर उड़कर सूरज को ढकने लगा। सूरज की किरणें उस पर पड़ीं, तो वह धीरे-धीरे भारी होने लगा—उसके अंदर पानी की बूंदें बनने लगीं।

“देखो-देखो, नीलू कितना ज़ोर लगा रहा है!” एक बड़े बादल ने मजाक बनाया।
दूसरा बोला, “इतनी मेहनत का भी क्या फायदा? तुम बारिश करवा ही नहीं सकते”

लेकिन नीलू ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। वह बस गाँव के बारे में सोच रहा था। उसकी बूंदें अब और मोटी होने लगीं, और उसका रंग गहरा होने लगा। धीरे-धीरे वह बारिश वाला बादल बन गया।

नीचे गाँव में अचानक ठंडी हवा चलने लगी। लोग आसमान की तरफ देखने लगे।
“लगता है बारिश आएगी!” एक किसान बोला।
“पर बड़े बादल तो हैं नहीं! ये कौन-सा बादल है?” दूसरे ने कहा।

नीलू अब तैयार था। उसने पूरी ताकत से खुद को हल्का किया और अपनी सारी जमा हुई बूंदें नीचे बरसानी शुरू कर दीं। टप-टप-टप… फिर झमाझम!

गाँव में खुशियों की लहर दौड़ गई। बच्चे बारिश में नाचने लगे। जानवरों को भी राहत मिली। खेतों में ताज़गी आ गई। फसलें खुशी से लहरा उठीं।

ऊपर बड़े बादल ये सब देखकर हैरान थे।
एक बोला, “इतना बड़ा काम… और वह भी अकेले?”
दूसरा बोला, “हम तो सोचते ही रह गए कि छोटा बादल कुछ नहीं कर सकता!”

नीलू अब हल्का होकर सफेद-सफेद हो गया था। वह खुश था कि उसने मदद की।

बड़े बादल शर्मिंदा होकर उसके पास आए और बोले,
“नीलू, तूने आज हमें सीख दी है। हिम्मत का आकार नहीं होता। तूने वह कर दिखाया जो हम सब मिलकर भी नहीं कर पाए।”

नीलू मुस्कुराया।
“मैंने बस कोशिश की।

कहानी से सीख : किसी का छोटापन उसकी कमजोरी नहीं होता। हिम्मत और नीयत ही इंसान—या बादल—को बड़ा बनाते हैं।

3.छोटी आदत, बड़ा बदलाव

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छोटी आदत – Hindi Inspirational story

बहुत समय पहले की बात है, हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे एक छोटे से गाँव “सूर्यमणि” में अर्जुन नाम का एक 10 साल का लड़का रहता था। अर्जुन बहुत होशियार था, लेकिन उसमें एक कमी थी—वह हमेशा ही अपने काम को टालता रहता। स्कूल का होमवर्क हो या घर के छोटे-छोटे काम, अर्जुन हमेशा कहता, “कल कर लूंगा,” और यह “कल” कभी आता ही नहीं था।

उसके माता-पिता समझाने की कोशिश करते है—
“अर्जुन, आदतें इंसान को बनाती या बिगाड़ती हैं।”
पर अर्जुन हँसकर बात टाल देता।

एक सुबह स्कूल में उसके शिक्षक, श्री वर्मा जी, बच्चों को आदतों पर एक कहानी सुना रहे थे। उन्होंने कहा,
“बुरी आदतें पेड़ की जड़ों जैसी होती हैं। जब वे छोटी होती हैं तो आसानी से उखाड़ी जा सकती हैं, लेकिन जब गहरी जड़ पकड़ लेती हैं, तब उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है।”

अर्जुन ने कहानी सुनी, पर उसे लगा कि यह तो सिर्फ बच्चों की कहानियां ( Bacchon ki kahaniyan) है।

उसी दिन स्कूल से लौटते समय अर्जुन ने देखा कि रास्ते पर एक छोटी-सी कांटेदार झाड़ी उगी थी। उसने सोचा कि रास्ता तो चौड़ा है, एक छोटी-सी झाड़ी से क्या फर्क पड़ेगा। वह उसे हटाने के बारे में सोचता भी नहीं। अगले कुछ हफ्तों में झाड़ी थोड़ी और बड़ी हो गई। अब कांटे दिखने लगे थे, लेकिन अर्जुन रोज़ उसे देखकर भी अनदेखा कर देता।

एक दिन गाँव के बुजुर्ग रमेश काका उसी रास्ते पर चल रहे थे और झाड़ी के तेज कांटों में उनका पैर लग गया। वे जोर से चिल्लाए। अर्जुन तुरंत उनकी मदद के लिए दौड़ा।
“काका, आप ठीक हैं?”
रमेश काका बोले, “मैं ठीक हूँ बेटा… पर देखो, जब यह झाड़ी छोटी थी, तब कोई इसे आसानी से निकाल सकता था। अब देखो कैसे दर्द दे रही है।”

अर्जुन को शिक्षक की बात याद आ गई—“छोटी बुरी आदतें भी ऐसी ही होती हैं।”

उस रात अर्जुन देर तक सोचता रहा। उसे जो होमवर्क मिला था उसके बारे में सोचना शुरू किया वह पहली बार खुद से कहा,
“नहीं, आज ये काम अभी करूँगा, कल पर नहीं छोड़ूँगा

अगले दिन उसने जल्दी उठने की आदत शुरू की। पहले दिन मुश्किल हुई, पर उसने थोड़ा-सा प्रयास किया। हर दिन वह एक छोटी-सी अच्छी आदत जोड़ता—
जल्दी उठना
होमवर्क समय पर करना
कमरा साफ रखना
स्कूल की तैयारी रात को ही करना
माँ की मदद करना

पहले-पहल मुश्किलें आईं, लेकिन धीरे-धीरे समय पर काम करने से उसे अच्छा लगने लगा। उसे महसूस हुआ कि उसके पास खेलने के लिए भी अधिक समय बचने लगा है।

एक सप्ताह बाद अर्जुन उसी रास्ते से गुज़रा और उसने देखा कि झाड़ी अब बहुत बड़ी हो चुकी थी। उसने तय किया कि आज इसे जड़ से निकाल दूँगा। उसने गाँव वालों की मदद ली। सबने मिलकर जोर लगाया, तभी जाकर झाड़ी उखड़ी।

कुछ महीनों में अर्जुन की नई आदतों ने उसका जीवन बदल दिया।
वह कक्षा में समय पर आने लगा।
• पढ़ाई में उसके नंबर बढ़ गए।
• शिक्षक उसकी तारीफ करने लगे।
• घरवाले भी खुश थे कि अर्जुन जिम्मेदार बन रहा है।

यह बदलाव देखकर उसके दोस्तों ने कहा,
“तुम, तू तो पूरी तरह बदल गया!”
अर्जुन ने हँसकर कहा,
“छोटी-छोटी आदतें बहुत बड़ा जादू करती हैं।”

कहानी से सीख :
अर्जुन ने हमें एक बड़ी सीख दी है। अच्छी आदतें धीरे-धीरे जोड़ो और बुरी आदतों को शुरुआत में ही रोक दो, नहीं तो वे कांटेदार झाड़ियों की तरह आगे चल कर दर्द और पछतावा ही होता है !

निष्कर्ष : 

दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपको ” 3 Inspirational Stories for Kids: प्रेरणा से भरी कहानियाँ ” शीर्षक वाली यह हिंदी प्रेरणादायक कहानियाँ,  पसंद आई होगी , ऐसी और भी “प्रेरणादायक कहानियाँ “, ” छोटी कहानियाँ ( Chhoti Kahaniyan),”,”Inspirational Stories for Kids” ,” Short Hindi Stories for Kids” की कहानी पढ़ने के लिए, हमारे ब्लॉग www.Sagadoor.in पर बने रहे , धन्यवाद !

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