बीरबल की खिचड़ी : अकबर बीरबल की रोचक कहानियाँ

बीरबल की खिचड़ी

इस कहानी के पात्र (Character’s of Birbal Khichdi Story ) :

  • शहंशाह अकबर
  • बीरबल
  • धोबी
  • कुछ दरबारी

बीरबल की खिचड़ी ( birbal ki khichdi) की शुरवात होती है , सर्दी के मौसम में शहंशाह अकबर सुबह – सुबह बीरबल के साथ जंगल की तरफ जाते है घोड़े पे सवार होके अब जैसे ही शहंशाह अकबर थोड़ा आगे बढ़ते है उन्हे ठंड लगती है ,

वह कहते है सुनो बीरबल

अकबर : आज बहुत ठंड है हम किसी और दिन चलते है

बीरबल : जी जहांपनाह

कुछ समय पश्चात ,

अकबर : बीरबल यह बताओ हम शहंशाह अकबर स्वयं इस ठंड में बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं है तो किया कोई व्यक्ति इतनी ठंड में बाहर निकल सकता है और अपना काम कर सकता है ?

बीरबल : जी जहांपनाह

अकबर ( गुस्से में ) : बीरबल तुम हमारी तौहीन कर रहे हो ।

बीरबल ( अकबर को शांत करते हुए ) : माफी चाहूंगा जहांपनाह मगर जो लोग समय से सही से भोजन नही कर पाते जो लोग कर्ज़ से डूबे हो उनके लिए ये कुछ भी नही है ।

बीरबल की खिचड़ी की कहानी
The poor Man – Birbal Khichdi Story

अकबर : ठीक है बीरबल हम देखना चाहते है की तुम्हारी बात में कितना सच है । अगले दिन शहंशाह अकबर ने घोषणा करा दी जो व्यक्ति एक रात नर्मदा नदी के ठंडे पानी में घुटने तक डूब कर पूरी रात रहेगा उसे तोहफ़े से पुरस्कृत किया जाएगा ।

कुछ समय बाद ,

एक धोबी जिसके पास बहुत समस्या थी उसने यह फैसला किया वह यह काम करेगा । और अपनी गरीबी दूर करेगा ।और नर्मदा नदी के ठंडे पानी में घुटने तक डूब कर खड़ा हो गया ।

अकबर : अगर तुम आज की रात इस नदी में ऐश रहते हो तो तुम्हे तोफेह से पुरस्कृत किया जाएगा ।

धोबी : जी जहांपहानाअब अगले दिन धोबी पहुंचा अपना तौफा लेने ।जब अकबर ने उस धोबी से पूछा की तुमने कैसे यह किया , पूरी रात तुमने नदी में खड़े हो कर कैसे बिताई ?

धोबी : जहांपहाना आपके सिपाही मेरे पर नजर रखे हुए थे मेने नदी से महल के एक कमरे में दीपक जलते देख और सारी रात उस दीपक को देख के अपनी रात गुजारी ।

अकबर : सिपाहियो इसे बंदी बना लो इसने उस दीपक की सहायता से रात गुजार पाया इसने हमे ठगा है ।

बीरबल : को यह सही नही लगता वह खिचड़ी बनाने का सोचता है , “बीरबल की खिचड़ी

अब शाम को अकबर ने देखा की बीरबल दरबार में नहीं है ।

सिपाहियो बीरबल को पेश किया जाया , सिपाही बीरबल के घर जाते है और बीरबल को यह सूचना देते है

बीरबल : शहंशाह अकबर को कहे हम खिचड़ी बना रहे है सभी दरबारियों और शहंशाह अकबर को कहें हमने उन्हें भोजन पे बुलाया है ।

शहंशाह अकबर को यह बात पता चली तो उन्हे खाने की इच्छा हुई खिचड़ी , बीरबल की खिचड़ी , बीरबल के हाथ की खिचड़ी ,शहंशाह अकबर और दरबारियों के साथ बीरबल के घर जाते है बीरबल की खिचड़ी खानें।

अकबर : बीरबल हमे खिचड़ी खाने की इच्छा है और कितना समय लगेगा ?

बीरबल : जहांपहना बस थोड़ी देर ,अब कुछ समय बाद , शहंशाह अकबर फिर बीरबल से पूछते हुए ,

बीरबल खिचड़ी बन गई ?

बीरबल : जहांपहना कुछ समय और शहंशाह अकबर को रहा नही गया ,

शहंशाह अकबर और सभी दरबारियों के साथ बगीचे में जाते है जहा बीरबल खिचड़ी बना रहा था ।

Birbal ki khichdi ki kahani
The Birbal Khichdi Story

शहंशाह अकबर और दरबरिए देखते है एक हांडी को पेड़ से बांध कर लटका दिया और नीचे थोड़ी सी आग जल रही ।शहंशाह अकबर और दरबारियों बीरबल के खिचड़ी के बारे में कहने लगे और सभी यह कहने लगे शहंशाह यह आपकी तौहीन है ।

बीरबल आपको भोजन पे बुला के आपकी तौहीन कर रहे है ।शहंशाह अकबर सभी दरबारियों को चुप कराते है ।

अकबर : सभी शांत हो जाए ,

अकबर : बीरबल यह सब किया है ?

बीरबल : जहांपहाना खिचड़ी बन रही है इस आग से

अकबर : हांडी तुमने इतनी दूर रखी है तो कैसे खिचड़ी पकेगी ?

बीरबल : ठीक वैसे ही जहांपहान जैसे उस गरीब धोबी ने इतनी दूर से महल के कमरे से छोटे से दीपक से रात भर नर्मदा नदी में घुटने तक डूब कर रहा । उस धोबी ने रात गुजारी वैसे ही इतनी दूरी से यह खिचड़ी बन जायेगी ।

शहंशाह अकबर : वोह बीरबल ! हम समझ गए तुम किया कहना चाहते हो । तुम बहुत चालाक हो बीरबल ऐसा कहा और शहंशाह अकबर ने उस धोबी को रिहा कर दिया और साथ ही उसे इनाम से पुरस्कृत किया गया ।

बीरबल की खिचड़ी का अर्थ :

बीरबल की खिचड़ी का अर्थ है की एक छोटी से काम को बड़ा करना अर्थात् एक सरल काम जो आसानी से हो सकता है उसे मुश्किल बनाना ।

बीरबल की खिचड़ी की कहानी से सीख (Moral of birbal khichdi story )

बीरबल की खिचड़ी की कहानी से हम सीखते हैं की हमे बिन सोचे समझे फैसला नही लेना चाहिए , हम नही जानते हमारे सामने वाले व्यक्ति ने कितनी मेहनत की है अपने काम को करने में , इस कहानी के अनुसार शहंशाह अकबर ने इस बात का ध्यान दिया की उस धोबी ने दीपक की सहायता से पूरी रात नदी में घुटने तक डूब कर रात गुजारी मगर जब उन्होंने बीरबल की खिचड़ी खाया तो समझे उनका फैसला गलत था ।

निष्कर्ष ( conclusion)

धायनवाद!

आशा करता हु आपको यह “बीरबल की खिचड़ीbirbal khichdi story” अकबर बीरबल की कहानी अच्छी लगी हो इस कहानी से हमने सीखा हमे बिन सोचे समझे फैसला नही लेना चाहिए , हम नही जानते हमारे सामने वाले व्यक्ति ने कितनी मेहनत की है अपने काम को करने में और भी बीरबल के चतुराई के किस्से पढ़े और जाने बीरबल ने कैसे अकबर के सवाल का जवाब दिया और हर मुश्किल को पार किया , इसी तरह अकबर और बीरबल की कहानियां ,अकबर और बीरबल के किस्से पढ़े हमारी इस वेबसाइट पे आपको हिंदी कहानियां ( hindi kahaniyan ) मिलेंगी जो आपको अपने बचपन में ले जाती है , और साथ ही साथ आपको जिससे कुछ सिखने का मौका भी मिलता है ।

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