मोती बोने की कला

एक सुबह शहंशाह अकबर उठते है और वह देखते है महल के चारो तरफ सब बीरबल के खिलाफ नारे लगा रहे थे ,
बीरबल पापी है , बीरबल पाखंडी है , बीरबल को सजा दी जाएं ,शहंशाह अकबर ने भरी जनमत बीरबल के खिलाफ देख आज्ञा दी की बीरबल को सूली पर चढ़ा दिया जाए
बीरबल ने अपनी अंतिम बात कहने की आज्ञा मांगी
आज्ञा मिलने पर बीरबल ने कहा ,
बीरबल : जहांपनाह मुझे जो भी पता था मेने आपको बता दिया मगर में आपको मोती बोने की कला नही सीखा पाया
अकबर : किया , किया सच में तुम मोती बोने की कला जानते हो ?
बीरबल : जी जहांपनाह !
अकबर : तो जब तक हम मोती बोने की कला नही सिख लेते तुम्हे जीने का अवसर है
अगले दिन ,
बीरबल ने कुछ ख़ास और विशेष महलों की तरफ इशारे करते हुए कहा इन्हें ढहा दिया जाए यह महल जिस जमीन पर बने है यहां को मिट्टी बहुत उपजाऊ है वह सारे महल उन लोगो के थे जिन्होंने बीरबल के खिलाफ झूठी शिकायत करने वाले कुछ दरबारियों के थी ,
आप उन महलों को ढहा देने के बाद वहां बीरबल ने जौ बो दिया और कहा अब अगली सुबह यह पौधे , कल सुबह मोती पैदा करेंगे ,
अब अगले दिन ,
सभी लोग आए और देखा पौधे पे ओस की बूंदे मोती की तरह चमक रही थी
बीरबल ने कहा : जहांपनाह अब जो व्यक्ति जिसने पूरी जीवन में गलती ना की हो जो निअपराध हो , जो दूध का धुला हो वह इन मोती को काट ले , मगर अगर किसी ने अपराध किया होगा तो यह मोती पानी बन के बिखर के गिर जाएंगी ,
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कोई आगे ना बढ़ा और ना ही किसी के पास क्षमता थी जो बीरबल की बात को गलत कर सके । अकबर समझ गए गलतियां हर कोई करता है हम उन गलतियों से किया सीखते है किया नही यह हमारे पे निर्भर करता है ।

कहानी से सीख ( Moral of Akbar birbal story ) :
अकबर बीरबल ( Akbar birbal) की इस कहानी से हम सीखते है की हमें बिना सोचे समझे किसी के पक्ष में आ कर फैसला नही लेना चाहिए ।
निष्कर्ष ( conclusion) :
आशा करता हु आपको यह अकबर – बीरबल की कहानी अच्छी लगी हो ” Akbar and birbal stories ” से हम यह भी सीखते है अपने जीवन के मुश्किल समय में भी हम डट के खड़े रहे सकते है जैसे हमने अकबर बीरबल की कहानी : मोती बोने की कला कहानी से सीखा और भी akbar birbal stories in hindi में पढ़े हमारी वेबसाइट पे बिलकुल फ्री में ।