पांच लडडू – चाचा भतीजे के किस्से
चाचा-भतीजे का रिश्ता हंसी, नटखटपन और शरारतों से भरा होता है। लेकिन ज़रा सोचिए—अगर इस प्यारे रिश्ते के बीच पाँच लड्डु आ जाएँ और बात इस पर अटक जाए कि कौन कितना खाएगा, तो क्या होगा? और यह छोटी-सी बात कब मज़ेदार शर्त में बदल जाती है , आइये इस शर्त को जानते है यह कहानी आपको इतना हंसाएगी कि आपके मन में भी लडडू खाने की इच्छा जाग उठेगी, यह पांच लड्डू की मजेदार कहानी : Short Hindi Stories” जो कि आपको हंसी के साथ ही साथ नैतिक शिक्षा भी देती है। तो आइए, बिना देर किए शुरू करते हैं यह मजेदार और दिलचस्प हिंदी कहानी ।
पांच लड्डू की मजेदार कहानी : Short Hindi Stories

पास के एक गांव से एक घर में शादी के लिए आमंत्रण आता है ,
उस घर में ज्यादा लोग तो नहीं थे , चार लोग थे ।
घर के बड़े किसी और काम से दूसरे गांव के लिए गये थे ,
बचे तीन लोग एक माता थी जिनकी अक्सर सेहत खराब रहती थी । वह जा नहीं सकती थी , अब बचे सिर्फ़ दो लोग एक चाचा और दूसरा भतीजा दोनों जानें के लिए तैयार हो गए ।
दोनों ही अगले सुबह तैयार हो कर , अच्छे कपड़े पहन कर निकल गए , ऐसा जैसे चाचा एक नंबरी हो तो भतीजा दस नंबरी ।
चलिये आगे पढ़ते इस कहानी के मज़ेदार मोड़ को,
दोनों ही शादी वाले घर पहुंचते ही , उनको काम पे लगा दिया गया चाचा को रसोई का काम संभालने के लिए दे दिया गया तो भतीजा को कुर्सियां सही से संभालने का काम दे दिया गया ।
उस रात लड़के वाले बारात लेकर लड़की वाले घर पे आए और शादी धुम – धाम से हुई ,
अब अगली सुबह ,
चाचा : में क्या बताऊ भांजे इतना काम तो मेने अपने घर पे कभी नहीं किया , जो प्याज़ मेने कल काटी है उसने आँखों में आंसू तो दिये ही है , साथ ही साथ यह खुशबू अभी तक आ रही है !
भांजा : हां , मेरी भी हालत खराब हो गई किसी को पानी देना तो किसी को कुछ , तो साफ – सफाई
फिर भांजे ने कहा : चाचा , लड्डू बचे हुए है क्या ?
चाचा : बचे तो नहीं है , मगर सामग्री है सारी ।
दोनों ने मेहनत कर बाटियाँ (बेसन में घी डालकर गोल लोइयां बनाई) को सेककर चूरमा बनाया फिर लड्डू बनाए ।

जब लडडू गिने तो पाए यह तो सिर्फ पांच ही है ,
भांजे ने बोला यह विचार मेरा था तो तीन मेरे और दो आपके !
चाचा : अच्छा बेटा ! मगर मेहनत मेने की है !
दोनों लड़ पड़े , दोनों आधा लड्डू बांटना के लिए भी तैयार नहीं थे ।
चाचा ने भांजे से शर्त लगाई हम दोनों चुप रहेंगे जो हम में से पहले जो कुछ भी बोलेगा वह दो लड्डू खायेगा और जो बाद में बोलेगा वह तीन ।
दोनों ने लड्डुओं को एक अलमीरा में छुपा दी ।
और दोनों चुप हो कर लेट गए बिस्तर पड़ ।
अब जब उस घर के यजमान आये तो उन्होंने दोनों को बहुत आवाज दी मगर कोई कुछ बोलने को कोई तैयार नहीं ,
यजमान ने आस पास के सभी व्यक्तियों को इकट्ठा किया और कहा देखो यह तो नहीं कुछ बोल रहे है और नहीं कुछ प्रतिक्रिया कर रहे है ।
यह सारी बातें वह दोनों ( चाचा – भतीजा ) सुन रहे थे मगर कुछ बोला नहीं उन्होंने ।
तभी एक गांव के व्यक्ति आए और कहा : यह दोनों तो मर गए है ।
घर के जो यजमान थे , कहा : कल ही शादी हुई है और आज यह सब हो गया ।
एक गांव का व्यक्ति बोला : अब सब ऊपर वाले की रचना है ,
अब कुछ नहीं कर सकते इन्हें अग्नि (Agni) दो ।
घर के जो यजमान थे वह भी अग्नि (Agni) के लिए तैयार हो गए ।
अच्छे से लकड़ियां लगाई गई और घास बिछाया गया ,
और उन दोनों ( चाचा – भतीजा ) के ले जाया गया , मगर फिर भी दोनों में से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं ।
दोनों को लकड़ियों पे लेटा दिया गया ।

चाचा ( मन ही मन ) : जान जाए तो जाए लड्डू तो तीन ही खाने है मुझे ।
भांजा ( मन ही मन ) : मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है एक लड्डू के चक्कर में स्वर्ग पधारना हो सकता है ।
जैसे ही यजमान लकड़ियों में आग लगाते है , वैसे ही
भांजा बोला : हम जीवित है , और चाचा भी उठ पड़े और बोले भांजा अब तू दो लड्डू खायेगा और में तीन ।
वैसे ही सभी लोग जो अग्नि देने आए थे , इस मैय्यत में शामिल हुए थे , वह डर के भाग गए और कहने लगे भूत , भूत आ गए भागो ।
सभी लोग भाग गए वहाँ से ,
चाचा : अब क्या करें भांजे ?
भांजा : एक काम करते है पहले तो मुंह – हाथ साफ कर लेते है और फिर लड्डू खाने चलते है ।
जैसे ही दोनों घर पहुंचे लोग उन्हें देख कर भाग गए
लेकिन घर के यजमान ने हिम्मत से काम लिया और मंत्र पढ़ने लगे ।
फिर दोनों ने सारी बात बताई लड्डू के शर्त की,
यजमान ने कहा : आप दोनों थोड़े देर से आए !
वह लड्डू तो में अपने बच्चों के साथ मिलकर थोड़ी देर पहले खा गए ।
वैसे आप लड्डू बनाते बहुत बढ़िया है ,
यह सुन दोनों चाचा और भतीजा के होश उड़ गए और उदास में कहा : अब पछताए होत क्या, भांजे , जब चिड़िया चुग गई खेत।
और यह कहानी यहां समाप्त होती है ।
कहानी से सीख :
कोई भी काम में जल्दबाजी सही नहीं है , मगर इस तरह की मूर्खता तो नहीं करनी चाहिए कि आप आधा लड्डू भी ना बाटों, अगर दोनों ने लड्डू बांट लिया होता तो ढाई – ढाई लड्डू खा लिये होते , मगर कहानी के अंत में कुछ भी नहीं मिला और अलग से इतनी मेहनत करनी पड़ी वह अलग। हमेशा आपस में मिल बाट के खाना खाएं या फिर वह लड्डू ही क्यों ना हो ।
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निष्कर्ष :
दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपको ” पांच लड्डू की मजेदार कहानी | Short Hindi Stories ” शीर्षक वाली यह दिलचस्प हिंदी कहानी, पसंद आई होगी , ऐसी और भी “मजेदार हिंदी कहानियाँ “, ” छोटी कहानियाँ ( Chhoti Kahaniyan),” ,”Short Stories in Hindi”,” Best Short Hindi Stories“,” Short Hindi Stories for Kids”, ” hindi kahaniyan with moral ” , ” Short Hindi Stories ” की कहानी पढ़ने के लिए, हमारे ब्लॉग www.Sagadoor.in पर बने रहे , धन्यवाद !