अतिथि और भीगती आँखें
कहा जाता है भारतीय संस्कृति में दान और खिलाने को सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। अपने हिस्से का निवाला किसी भूखे को खिलाना आपको एक साधारण इंसान से ऊपर उठाकर एक ‘दाता’ की श्रेणी में खड़ा कर देता है।
लेकिन क्या हो जब आपका हफ़्तों तक का यह त्याग भूखा सोने पड़ मजबूर कर दे पढ़िए यह मज़ेदार हिंदी कहानी इसका अंतिम मोड़ आपको आनंद के साथ ही साथ नैतिक शिक्षा भी देता है जिससे आप दुनिया को एक अलग नजरिए से देखते है , चलिये शुरू करते है बिना देर किए अतिथि और भीगती आँखें : Best Hindi Stories ।
अतिथि और भीगती आँखें : Best Hindi Stories

यह कहानी है तमिलनाडु के छोटे से गांव की ,
एक पुजारी जिसका नाम अयप्पा पुत्तम था, वह अपनी पत्नी के साथ रहता था जिनका नाम लक्ष्मी था ।
अयप्पा पुत्तम बहुत परोपकारी और दान में विश्वास रखते थे वह अक्सर अजनबियों को अपने घर खाना खाने के लिए बुला लिया करते थे , वह दूसरे को खाना खिला कर अपना धर्म समझते थे । उन्हें यह भी पता नहीं होता था कि घर पर पर्याप्त भोजन है या नहीं ।
उनकी पत्नी लक्ष्मी हमेशा ही अपने पड़ोसियों से कभी चावल तो कभी सब्जी उधार मांग लिया करती ,
वह अयप्पा पुत्तम के इस आदत से हमेशा दुखी रहती कभी- कभी तो लक्ष्मी अपने हिस्सा का खाना अतिथि को खिला दिया करती और खुद भूखी रहती ।
उनके पड़ोसियों को विश्वास नहीं होता था कि यह लोग इतने गरीब है क्योंकि अक्सर ही अतिथि आते और खाना खा के जाते ।
एक रात जब अयप्पा पुत्तम खाना खाने के बाद सो रहे थे तब ।
लक्ष्मी रोने लगी ,
अयप्पा पुत्तम : क्या हुआ भाग्यवान ?
तुम रो क्यों रही हो,
लक्ष्मी कपड़े के एक छोड़ से आंसू पोंछ कर
लक्ष्मी रोते हुए बोली : सुनिये जी ! आप जो यह अक्सर बाहर के लोगों को खाने के लिए ले आते है, हम लोग इतने गरीब है कि हमारे पास जो रूखा – सूखा होता है वह हमारे लिए पर्याप्त नहीं है ! मुझे कई बार हफ्तों – हफ्तों तक भूखा सोना पड़ता है अब ऐसा नहीं चलेगा !
अय्यप्पा पुत्तम ( मन ही मन ) : इसकी इतनी हिम्मत यह मेरे से ऐसे बात नहीं कर सकती ,
क्योंकि लक्ष्मी ने इस तरह कभी बात नहीं की थी |
फिर कुछ देर बाद ,
अयप्पा पुत्तम (शांत होकर) : मे तुम्हे तुम्हारी मूर्खता के लिए क्षमा करता हु , तुम जो यह बलिदान करती हो , इससे मेरा कल्याण होगा ! और यह ही तुम्हारा पत्नी धर्म है ।
लक्ष्मी पूरी रात सो नहीं पाई और रोती रही ।
दिनचर्या के हिसाब से अयप्पा पुत्तम मंदिर के लिए निकल गए।
अक्सर हर – बार की तरह दोपहर के भोजन में अयप्पा पुत्तम दो अजनबियों को खाने के लिए ले कर आ रहे थे ।
लक्ष्मी ने यह दूर से ही देख लिया और मन ही मन कहा : अयो ! मुझे आज फिर भूखा सोना पड़ेगा !

तभी वह कुछ सोचती है ।
अयप्पा पुत्तम उन्हें खटिया पर बैठ कर कहते है में अभी हाथ धो कर आया ।
लक्ष्मी ने एक मुसल ( धान कूटने वाला डंडा ) दीवार के सहारे खड़ी कर देती है आस – पास फूल बिखरे कर उसपे तिलक कर, दिया जला कर उसकी पूजा करने लगती है , वह यह सब उस जगह से कर रही थी कि अतिथियों को साफ – साफ दिखाई दे ।
वह दोनों आए और कहा : आप मुसल ( धान कूटने वाला डंडा ) की पूजा कियो कर रही हो ?
लक्ष्मी : इसका संबंध आप से ही जुड़ा है , में आपके सामने अपनी पति की बुराई कैसे कर सकती हु ?
अब वह दोनों और भी जिज्ञासा में थे जानने के लिए !
लक्ष्मी ने कहा : पहले आप वादा कीजिये मेरे पति या किसी भी व्यक्ति को आप बताएंगे नहीं !
दोनों अतिथि : हम वादा करते है ,
दोनों अतिथि लक्ष्मी के पीछे पड़ गए सच जानने के लिए !
लक्ष्मी ने कहा : मेरे पति परोपकारी हैं वह अक्सर ही अतिथि को खाना, खाने के लिए बुला लेते है और उनके खाने के बाद , इस मूसल ( धान कूटने वाला डंडा ) से उनकी खूब पिटाई करते है वह इसे अपना धर्म मानते है , यह मारने- पीटने से मेरा कोई संबंध नहीं है । मुझे पाप ना लगे इसलिए में इस मूसल की पूजा करती हु ।
यह सुनते ही दोनों आपस में इशारो – इशारो में बात कर, यहां से चुपचाप भागने में ही भलाई है ।
अयप्पा पुत्तम जब आते है तो कहते है अतिथि कहा है ?

लक्ष्मी : जी आप मुझे मेरी मूर्खता के लिए माफ़ कर दीजिए वह मुझ से यह मूसल मांग रहे थे , हमारे घर में यह एक ही मूसल है इसलिए मेने देने से मना कर दिया ।
तो वह नाराज़ हो कर चले गए !
अयप्पा पुत्तम : तुमने हमारे अतिथि का अपमान किया है और गुस्से से अपने पत्नी के हाथ से मूसल ले कर
उनके पीछे भागने लगे ।
वह दोनों अतिथि आपस में बात करते हुए देखो वह हमे मारने के लिए आ रहा है जल्दी भागो ।
यह बात पूरे गांव में फैल जाती है कि अयप्पा पुत्तम अपने घर में अतिथि को बुला कर उन्हें मूसल से पिटाई करता है और खाना भी नहीं खिलता ।
लक्ष्मी के बुद्धिमता ने उसे बचा लिया । और इसके बाद वह कभी भूखी नहीं सोइ।
कहानी से सीख :
दान-पुण्य करना बहुत अच्छी बात है, लेकिन इसे अपनी परिस्थितियों को समझकर करना चाहिए।
आप चाहें तो एक दिन खुद भूखे रहकर अपने मेहमान को खाना खिला सकते हैं, मगर आप हफ्तों तक ऐसा नहीं कर सकते , सबसे ज़रूरी है कि आप पहले अपने आप का ध्यान रखें।
क्योंकि जब आपका स्वास्थ्य अच्छा होगा तो आप सक्षम होकर अच्छा कमाएँगे, तभी आप दूसरों की और भी बेहतर तरीके से मदद कर पाएँगे।
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निष्कर्ष :
दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपको ” अतिथि और भीगती आँखें : Best Hindi Stories” शीर्षक वाली यह हिंदी प्रेरणादायक कहानी, पसंद आई होगी , ऐसी और भी “प्रेरणादायक कहानियाँ “, ” छोटी कहानियाँ ( Chhoti Kahaniyan),” ,”Short Stories in Hindi”,” Best Hindi Stories“,” Short Hindi Stories for Kids”, ” hindi kahaniyan with moral ” , ” Best Hindi Stories ” की कहानी पढ़ने के लिए, हमारे ब्लॉग www.Sagadoor.in पर बने रहे , धन्यवाद !
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