बच्चों की कल्पना से मिलती हुई 100+Hindi Story For Kids मज़ेदार, रोमांचक और सीख से भरपूर कहानियाँ! हर उम्र के बच्चों के लिए छोटी-छोटी हिंदी कहानियां, जो उन्हें मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक मूल्य भी सिखाएँ। सोने से पहले सुनाने के लिए बेहतरीन कहानियां जिसमें है—प्यारे किरदार, दिलचस्प घटनाएँ और आसान भाषा जो बच्चों को बांधे रखे। अभी पढ़ें और बच्चों की दुनिया को कहानियों के रंग से भर दें!
1.समय का सही उपयोग

रवि और मोहित दो मित्र थे , दोनों एक ही कक्षा में साथ ही पढ़ाई करते थे, पर रवि समय पर काम करता था जबकि मोहित अक्सर ही काम को टाल ने का बहाना बनाया करता और समय पे कभी काम पूरा नहीं करता ,परीक्षा नज़दीक आते ही रवि ने अपनी तैयारी कर ली, लेकिन मोहित सोचता रहा कि अभी बहुत समय है।
परीक्षा से एक दिन पहले मोहित घबरा गया, उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या पढ़े और कितना पढ़े। रवि ने उसकी मदद की, पर समय बहुत कम था।
अगले दिन परीक्षा हुई, रवि ने सभी सवाल आसानी से हल कर लिए, जबकि मोहित कई सवालों से उलझा रहा। रिज़ल्ट आने पर रवि के अच्छे अंक आए, लेकिन मोहित के कम अंक आए और वह निराश हो गया।
उसने रवि से पूछा, “तुम कैसे इतना शांत और तैयार थे ? ”
रवि : “मैं रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ता हूँ और समय का सही उपयोग करता हूँ ” और पूरी तरह तैयार था परीक्षा के लिए,इस कारण मुझे आखिरी समय में चिंता नहीं हुई और शांत मन से मेने परीक्षा में सवाल हल किए ।
मोहित ने उस दिन फैसला किया कि वह भी अब समय की कद्र करेगा और अपना काम को टालने की बजाय उस काम को जल्द से जल्द करने की कोशिश करेगा ।
कहानी से सीख : समय को महत्व देने वाला ही सफल होता है।
2.राजा की अजीब शर्त

एक बार की बात है एक राजा जंगल में सैर करने जाते है उन्हें जंगल में एक छोटा सा नन्हा हाथी दिखता है वह हाथी बहुत आकर्षित और प्यारा था , राजा मन बना लेते है और कहते हमे यह हाथी चाहिए,
सेनापति और शिकारी मिल कर उसे पकड़ लेते है ,
और राजा को सौंप देते है ,
राजा अपने एक सहायक को कहते है इसका आपको अच्छे से ख्याल रखना है , लेकिन एक शर्त यह है कि जिसने यह सूचना दी कि हाथी मर गया है उसे अपने प्राण देने होंगे ,
सहायक : डर गया ! मगर उसने अपना सर हां में हिलाया !
वह सहायक बहुत अच्छे से उस हाथी का ख्याल रखने लगा , उसको समय पे खाना खिलता और नहलाता
बीच – बीच में राजा उस सहायक से सूचना भी लेते रहेते,
कुछ साल बाद ,
एक दिन सहायक देखता है हाथी कोई प्रक्रिया नहीं कर रहा है , उसने जब अच्छे से देखा तो पता चला हाथी तो मर गया है,
अब वह चिंतित हो गया अगर इसकी सूचना अगर राजा को पता चला तो मुझे अपने प्राण देने होंगे ,
क्या करे , कुछ समझ नहीं आ रहा था ,
वह सहायक बस यही सोच रहा था अब बस कुछ दिन की जिंदगी है मेरी , और अपने घर जाने लगा एक व्यक्ति ने उस सहायक को देखा
सहायक बहुत चिंतित लग रहा है , जब उस व्यक्ति ने पूछा तो उसने वह सारी बात बताई और यह कि राजा के शर्त के मुताबिक जो कोई भी हाथी के मरने की सूचना देगा उसे अपने प्राण देने होंगे ,
उस व्यक्ति ने थोड़ा सोचा और कहा धैर्य रखो कुछ नहीं होगा सहायक को पास बुलाया और उसके कान में बोला बस यही करना है अब ,
अब अगले दिन उस सहायक को राजा ने हाथी की सूचना लेने के लिए बुलाया ,
राजा : सहायक ! बताओ कैसा है हमारा हाथी ,
सहायक : राजा जी , अब तो वह हाथी ना हिलता है , ना ही खाता है , और नहीं चलता , और यहां तक अपनी आंखें भी नहीं खोलता है ,
सभी दरबारी लोग सोच में पड़ गए यह सहायक क्या कह रहा है ?
राजा ( ध्यान देते हुए ) : हाथी नहीं हिलता है , नहीं चलता है और नहीं खाता है तो किया वो मर गया है !
सहायक : माफ कीजिए हुजूर , मगर यह सब तो आपको कहने की इजाज़त है , हमे नहीं !
राजा : थोड़ा सोचे और कहां , बहुत खूब हम समझ गए तुम किया कहना चाहते हो ! इस तरह अपने बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया है तुमने हम तुम्हे इनाम भी देते है ,
और मंत्री से कह कर सहायक को इनाम से पुरस्कृत भी किया गया ,
कहानी से सिख :
धैर्य से सोच समझ कर किया गया काम और सोच समझ कर बोलना यह आपको वृद्धि ही देता आपके काम में जैसे उस अंजान व्यक्ति ने सहायक की मदद की और बताया धैर्य से काम लेने से बड़ी से बड़ी समस्या को टाल सकते हैं ।
केवल अच्छा सोचिए अच्छा होगा !
3.पढ़ाई और खेल दोनों जरूरी

नीरज पढ़ाई में बहुत अच्छा था, लेकिन खेलना उसे समय की बर्बादी लगता था। उसके दोस्त रोज़ मैदान में फुटबॉल खेलते, पर नीरज किताबों में डूबा रहता।
एक दिन स्कूल में खेल दिवस (Sports Day) की घोषणा हुई। सभी बच्चों ने उत्साह दिखाया। नीरज के शिक्षक ने सुझाव दिया कि वह भी किसी खेल में भाग ले।
पहले तो नीरज ने मना किया, लेकिन दोस्तों के कहने पर वह दौड़ प्रतियोगिता में शामिल हो गया। हालांकि उसने कभी अभ्यास नहीं किया था, इसलिए वह जल्दी ही थक गया और हार गया।
नीरज निराश था, तब उसके शिक्षक ने कहा, “बेटा, जैसे दिमाग को पढ़ाई की जरूरत है, वैसे ही शरीर को खेल की दोनों साथ चलेंगे तो ही तुम पूरी तरह स्वस्थ रहोगे।”
नीरज ने बात समझी और रोज़ थोड़ा-थोड़ा खेलने लगा, आगे वाली प्रतियोगिता में उसने अच्छा प्रदर्शन किया।
कहानी से सीख : पढ़ाई और खेल दोनों जरूरी हैं—इनमें संतुलन सफलता लाता है।
4.अनोखा सपना

मेरा नाम रोशन है में 16 साल का हु में , हमेशा अपने फैसले खुद लेने की कोशिश करता हु पड़ ऐसा होता नहीं है ।
क्योंकि मेरे घर वालों मुझे फैसला लेने नही देते क्योंकि उनका लगता है में गलती कर सकता हु इसलिए वह जो भी बोलते है में वही करता हु ।इस साल मेने दसवीं कक्षा पास किया और अब में ग्यारवी कक्षा में जाने वाला हु अब में अपनी पढ़ाई Arts ले कर आगे बढ़ना चाहता हु ,
मगर मेरे पड़ोस के कुमार जी के लड़के ने साइंस (science) लिया है और मेरे घर वाले मुझे कह रहे है अच्छे बच्चे हमेशा साइंस (science) ही लेते जिनको scientist बनना होता है और इंजीनियर ( Engineer ) बनना होता है ,डॉक्टर ( Doctor ) बनना होता है ।
Arts आपके लिए सही नही है उन्होंने कहा ,मेने कई बार आपने माता – पिता से बात की मगर वे नहीं माने ,
यहां तक उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया बहुत बिगड़ गए हो तुम जरूर ये सब तुम्हारे कम मार्क्स लाने वाले दोस्त ने कहा होगा । में अब कुछ नहीं कर सकता था । मेने बताया मेरे दोस्त के कम मार्क्स है मगर वह काफी अच्छा है दिल का , मेरा दोस्त Arts ले कर पढ़ना चाहता इसलिए नहीं की उसके कम नंबर है इसलिए की उससे Arts अच्छा लगता है । मेरे पापा नहीं माने में निराश हो के सो गया ।
अब जब में उठा अगले दिन में चौंक गया था , में पता नही कैसे में 50 साल का हो चुका था में एक इंजीनियर ( Engineer ) बन गया था , मुझे लगता है मेने अपने माता – पिता की बात मानी और मेने साइंस (science) ले कर आगे बढ़ा था ,मेरा कही भी मन नहीं लग रहा था मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था मेरे सर के आधे बाल नहीं थे , मेरी शादी हो चुकी थी मेरी बीवी मुझे पसंद नही करती थी और नही मे अपनी बीवी को शयाद मेने अपनी शादी भी किसी के कहने पे की थी ,
मेरा एक बच्चा था , मेने अपने दोस्त से मिला जिसने Arts ले कर पढ़ाई की वह अपनी लाइफ में बहुत आगे बढ़ गया था वह एक chef बन गया था उसने अपना खुद का एक रेस्टोरेंट भी खोला था और वह अपनी जिंदगी में बहुत अच्छा कर रहा था , और अच्छा किया भी उसने शादी भी उसने अपनी पसंद से की उसने अपनी पूरी जिंदगी जी खुशी से , एक तरफ में अपनी जिंदगी पूरी तरह से एक बोझ की तरह जिया ,मेरा एक बच्चा उसने मुझ से पूछा एक दिन पापा में ग्यारव्ही कक्षा में जाने वाला हु आप बताए में किया करू में पता नही क्यों चिल्लाया मुझे अपना बचपन वापस चाहिए फिर कहा अपने फैसले खुद लेने चाहिए ,
और जोर जोर से चिलाने लगा और मेरे घर वालों ने दरवाजा खोल के मेरे पास आ गए और कहा ठीक है बेटा जो तुम्हे बनना है वो ही बनो और जो तुम लेना चाहते हो वही चुनो तब मुझे पता चला यह मेरा सपना था , इस सपने की वजह से में इतना तेज चिल्लाया की मेरे घर वाले भी डर गए और मान भी गए |
कहानी से सीख : हमे अपने फैसले खुद लेना चाहिए अगर आपको यह लगता है आप फैसला नही ले सकते तो आप अपने माता – पिता से राय ले सकते आप उन्हें यह बता सकते है मुझे यह अच्छा लगता है में यह करना चाहता हु तो वह जरूर आपको सही फैसला लेने में मदद करेंगे । हालांकि इस कहानी से हमने जाना रोशन के अनोखा सपने ने उसकी मदद की । और उसने सही फैसला लिया , उसने जाना गलत फैसला से किया हो सकता है ।आशा करते हैं आपकी ये पोस्ट की ये कहानी अच्छी लगी हो |
5.भविष्य खतरे में

भविष्य खतरे में है अपने अक्सर अपने दादा जी या नाना जी या आस पड़ोस के लोगों से सुना होगा अगर यह कर लिया होता तो आज कुछ और होते वह कर लिया होता तो आज कुछ और होते आज की यह कहानी सच्ची आधारित घटना पर ही लिखी है पढ़िए और जानिए कैसे भविष्य खतरे में है ।
यह कहानी है आशीष की , आशीष ने अपने बचपन में ही सोच लिया था उसे इंजीनियर बनना है आर्किटेक्चर इंजीनियर ( Architecture Engineer ) और उसका सपना था की वह अपना घर खुद से बनाए ,कुछ समय तो इन बातें पे ध्यान देता है मुझे किया करना चाहिए और किया नहीं मगर धीरे धीरे वह सोचता है में यह आसानी से कर लूंगा और मस्त तरीके से जीने लगता उसके नंबर भी बहुत कम आने लगते है उसके माता – पिता भी कहते है बेटा पढ़ ले मगर वह यह सोचता है भविष्य में सुधार लूंगा अभी मुझे दोस्तों के साथ घूमने जाना है ,और ऐश करते करते वह बड़ा हो जाता है उसका इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला भी नही हो पाता और इंजीनियर भी नही बन पता है ।
और B.A कर के छोटी सी नौकरी करता है । हम भविष्य के बारे बहुत कुछ सोचते है मगर वह मेहनत ही नहीं करते , हम सोचते है हम अपना भविष्य सुधार लेंगे मगर सच तो यह है की भविष्य होता ही नही है हमारा आज ही भविष्य होता है अगर अपने आज को बेहतर बना ले तो हमारा भविष्य भी बेहतर होगा ।
कहानी से सीख : इस कहानी से हम सीखते है की बचपन में मस्ती करना सही है लेकिन ऐसा नहीं की अपने लिए अनुशासन ना रखें और अपना काम समय पड़ पूरा करें अगर आज बेहतर बनेगा तो कल ही बेहतर बनेगा नहीं तो कोसने के अलावा और कुछ नही बचता हमारे पास । आशा करते हैं आपकी ये पोस्ट की ये कहानी अच्छी लगी हो |
6. गुस्सा मत करो

समीर बहुत अच्छा बच्चा था, लेकिन उसे जल्दी गुस्सा आ जाता था। स्कूल में दोस्त छोटी-छोटी बात पर तंग करते तो वह चिल्ला पड़ता। एक दिन उसके पिता ने उसे कुछ कीलें और एक हथौड़ा दिया। उन्होंने कहा, “जब भी गुस्सा आए, इस दीवार में एक कील ठोकना।” कुछ दिनों में दीवार कील से भर गई। फिर पिता ने कहा, “अब जब भी गुस्सा आए नियंत्रण करने की कोशिश करना और एक कील दीवार से निकालना।” धीरे-धीरे समीर कीलें निकालता गया और गुस्सा कम होने लगा। जब सभी कीलें निकल गईं, पिता उस दीवार दिखाकर बोले, “देखो, कील निकाल गई, पर निशान रह गए। ऐसे ही गुस्से के शब्द भी दिल में निशान छोड़ते हैं।”
कहानी से सीख : गुस्सा रिश्तों को नुकसान पहुँचाता है।
7.मदद करने में खुशी

आज सभी बच्चों को स्कूल में पढ़ाया जाता है की हमे सब की सहायता करनी चाहिए जिससे आप सभी का आत्मसम्मान बढ़ेगा और आने वाले समय आप आत्मनिर्भर बन सकते है । शिक्षिका कहती है में आप सभी को एक काम देती हु, आज आप लोग एक अच्छा काम करेंगे जैसे किसी की सहायता करना या घर में अपने माता पिता की सेवा करना या उनके काम में अपना सहयोग देना ।
सीमा अक्सर ही स्कूल की छुट्टी होने के बाद खेला करती खेलने के बाद वह अपने घर जा रही थी रास्ते में सीमा के कुछ दोस्त मिलते जो उसे तालाब किनारे ले जाते है खेलने के लिए,
उस समय सभी दोस्त अच्छा काम करने के बारे में सोचते है और थोड़ी देर खेलने के बाद सभी अपने घर की तरफ चले जाते है,
जब सीमा अपने घर की तरफ निकलती है तो वह देखती है तालाब के किनारे एक कछुआ पलटा हुआ था जो पूरी कोशिश कर रहा था सीधे होने की मगर वह हो नहीं पा रहा था , तभी सीमा अपना हाथ लगा के उसे सीधा कर देती है और मन ही मन सोचती है यह कितना प्यार है !
तभी उसे ख्याल आता है शिक्षिका ने जो उसे काम दिया था वह पूरा हो गया उसने एक कछुए की मदद की और वह बहुत खुश हो जाती है !
सीमा बहुत खुश थी कि आज उसने अच्छा काम किया !
जब वह घर पहुंचती है तो अपने माता पिता को बताती है उसके माता पिता कहते है बहुत बढ़िया सीमा , हमे अक्सर ही सभी की सहायता करनी चाहिए !
जब हम किसी की सहायता करते है तो आने वाले समय में हमारी भी कोई न कोई सहायता करेगा और इससे हमारा आत्मसम्मान भी बढ़ता है।
कहानी से सीख : कभी कभी एक छोटी सी सहायता आपके सामने वाले के चेहरे पे खुशी ले आती है चाहे वह व्यक्ति हो या पशु ।
8.मेरी मां

कुछ हफ्ते पहले की बात है में एक ऑटो ( Auto) से सफर कर रहा था ,उस ऑटो में चार लोग बैठ हुए थे में पांचवा व्यक्ति था |
उस ऑटो में , मेने देखा के एक मां अपने बच्ची के साथ है और उनका पति भी साथ में था और एक कोई बुजर्ग व्यक्ति और एक महिला थी, अचानक से वह बच्ची रोने लगी,उसकी मां ने बोला बेटा चुप हो जा में यह सब देख रहा था मगर वह बच्ची नहीं मानी वह और रोने लगी , पास वाली महिला ने बोला किया हुआ ! क्यों परेशान कर रहा है ? अपनी मम्मी को चुप हो जा देख कार्टून देखेगा मगर कोई फायदा नही हुआ,
वह बच्ची फिर रोने लगी मगर उसकी मां उसे चुप कराने में ही लगी रही फिर उसकी पीठ थपथपाने लगी मेरा अच्छा बच्चा , उसी समय एक पुलिस बाइक से जा रहा था उसकी मां ने देखा कहा देखो पुलिस जा रहा है वह यह ही देखने आए है की कोन सा बच्चा रो रहा है , चुप हो जा नही तो वह घर पे भी आ जायेगे सब को जेल हो जायेगी मगर फिर भी वह चुप नही हुई फिर उसके पिता ने एक बार कोशिश की मगर बच्ची शांत नहीं हुई,
पता नही ऐसा किया ठान रख था की वह बच्ची चुप ही नहीं हुई और आखरी में उनका घर आ गया ।वह बच्ची बहुत प्यारी थी पड़ पता नहीं वह क्यों चुप नहीं हो रही थी । वह बच्ची सिर्फ 3 – 4 साल के आस – पास होगी ।
कहानी से सीख : मेने इस सफर में देखा सब लोगों ने एक बार कोशिश की उस बच्ची को चुप कराने की या दो बार फिर हार मान गए मगर मां लगातार अपनी बच्ची को चुप कराने में लगी रही , तो मां एक अपने बच्चे को चुप कराने के लिए लगातार मेहनत कर सकती है तो , हम क्यों नहीं मेहनत करते हैं अपने अच्छे भविष्य के लिए और माँ की खुशियों के लिए |
9.कर्म का फल

एक छोटे से गाँव में एक गरीब बूढ़ी औरत रहती थी, उसके पास ज्यादा कुछ नहीं था , लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। एक दिन ठंडी शाम को उसने देखा कि एक घायल चिड़िया उसके दरवाजे पर पड़ी है।
वह तुरंत उसे उठाकर घर ले आई और उसकी मरहम-पट्टी करने लगी।
रोज उसे खाना देती और देखभाल करती,कुछ हफ्तों में वह चिड़िया ठीक हो गई।
एक सुबह चिड़िया उड़कर चली गई। बूढ़ी औरत उदास हुई, मगर खुशी इस बात की थी वह ठीक हो गई और हवाओं में अच्छी तरह से उड़ सकती थी ।
कुछ दिनों बाद तेज बारिश हुई। बूढ़ी औरत का घर लकड़ियों का था , जिस वजह से तेज बारिश की वजह से वो गिरने लगा , बूढ़ी औरत जब अपने घर से बाहर आई तो कई लोग उसके घर के तरफ आ रहे थे जो सहायता के लिए आए थे , जो घर टूटने लगा था । बूढ़ी औरत ने जब आस पास देखा तो उन्हें वह ही चिड़िया दिखी , जो कुछ हफ्ते पहले मिली थी ,
एक व्यक्ति ने कहा यह मेरी चिड़िया है यह मुझे इस तरफ का इशारा करते हुए ले आई और यहां देखा तो आपका घर बारिश में गिर रहा था मगर अब कोई बात नहीं सब सही हो गया है ,
और वह बूढ़ी औरत कुछ नहीं कहती बस मुस्कुराती रहती है , और यह कहानी यहां समाप्त होती है
कहानी से सीख : दया कभी व्यर्थ नहीं जाती और आपका कर्म आपके पास जरूर लौट आता है भले ही आप अच्छा या बुरा काम करते है ! सदैव अच्छा रहे अच्छा सोचे ।
10.दो घड़ों की कहानी

एक समय की बात है, एक किसान रोज़ अपनी दोनों मिट्टी की घड़ों में पानी भरकर घर लाता था। एक घड़ा बिल्कुल ठीक था, जबकि दूसरा थोड़ा-सा टूटा हुआ था। रास्ते में चलते समय टूटा घड़ा थोड़ा-थोड़ा पानी टपकाता रहता था।
एक दिन टूटा घड़ा बहुत दुखी हो गया। उसने अच्छे घड़े से कहा, “तुम कितने मजबूत हो , पूरा पानी लेकर चलते हो। लेकिन मैं? मैं तो अधूरा हूँ… मेरे कारण मालिक को कम पानी मिलता है।”
अच्छा घड़ा चुप रहा, लेकिन टूटा घड़ा उदास ही रहा।
अगले दिन किसान रास्ते से पानी भर के जा रहा था तो उसने देखा , टूटा घड़ा उठाया और टूटे घड़े से मुस्कुराते हुए बोला , “तुम सोचते हो तुम बेकार हो, पर तुमने रास्ते को खूबसूरती दे दी है।”
टूटा घड़ा हैरान हो गया, “मैंने? कैसे?”
किसान उसे रास्ते की तरफ इशारा करता है। टूटा घड़ा क्या देखता है—रास्ते के एक किनारे पर खूबसूरत फूलों की कतार लगी थी।
किसान बोला, “हर दिन तुमसे टपकता पानी इन पौधों को सींचता रहा। तुम्हारी वजह से ये फूल खिले हैं। अगर तुम न टूटे होते, तो यह रास्ता इतना रंगीन और खुशबूदार न होता।”
टूटा घड़ा खुशी से भर गया। उसे समझ आया कि उसकी कमी ही किसी और की खूबसूरती का कारण बनी।
कहानी से सीख : हर इंसान में कुछ न कुछ कमी होती है, लेकिन कई बार वही कमी किसी और के लिए वरदान बन जाती है। खुद को कमज़ोर या बेकार न समझें—हर किसी की अपनी खासियत और महत्व होता है।
11. दो बिल्लियां और बंदर : पंचतंत्र की हिंदी कहानियां
एक छोटे से गाँव के पास हरा-भरा जंगल था। उसी जंगल में मीना और रीना नाम की दो बिल्लियाँ रहती थीं। दोनों एक साथ दिन-रात खेलती और चलती-फिरती रहतीं थीं। दोनों अच्छी दोस्त थीं, लेकिन कभी-कभी बहुत छोटी-छोटी बातों पर झगड़ भी लेती थीं। एक दिन दोनों को रास्ते पे एक ताजी रोटी का टुकड़ा मिला।
मीना खुश होकर बोली, “वाह! यह तो मेरी रोटी है, इसे पहले मैंने देखा है। “

रीना ने उसे तुरंत मना कर दिया, “ नहीं-नहीं मैने इसको पहले उठाया, इसलिए यह मेरी रोटी है। “
कुछ ही समय बाद, दोनों बिल्लियाँ एक-दूसरे से बिल्कुल ज़ोर-ज़ोर से झगड़ने लगी। कोई भी रोटी बाटने को तैयार नहीं थी। तभी रीना ने कहा, देखो पेड़ पे बैठा बंदर, वह शायद सही फैसला करेगा। और फिर दोनों गई बंदर के पास। वहां पर बंदर पेड़ पर बैठा हुआ केला मज़े से खा रहा था।
बिल्लियाँ ने पूरी कहानी सुनाई। बंदर ने सर हिलते हुए कहा- चिंता मत करो! मैं न्यायप्रिय हूँ और मैं इस रोटी को बराबर-बराबर बाँट दूँगा। उसने रोटी को दो टुकड़ों में तोड़ा। लेकिन फिर भी एक टुकड़ा थोड़ा बड़ा हो गया। बंदर ने बहुत जोर से बोला- अरे हो..यह तो ज्यादा हो गया है। न्याय के लिए मुझे थोड़ा खाना पड़ेगा और उसने थोड़ा सा हिस्सा को खा लिया। अब तो दूसरा टुकड़ा और भी बड़ा दिखने लगा। बंदर फिर जोर से बोला- अरे़… “अरे यह तो बड़ा हो गया। इसे भी बराबर करना पड़ेगा,” उसने फिर थोड़ा सा हिस्सा को खा लिया। मीना और रीना एक-दूसरे के मुँह की ओर देखने लगीं। मीना बोली, “लगता है कुछ गड़बड़ है। ” रीना बोली, “ हाँ, लेकिन अब क्या करूँ? बंदर बार-बार कभी एक टुकड़े से, कभी दूसरे से खाता रहा। थोड़ी देर में पूरी रोटी खत्म हो गई |
बंदर पेट सहलाते हुए बोला,
“लो! अब दोनों हिस्से बराबर हो गए। न्याय हो गया!”
और हँसता हुआ पेड़ पर चढ़ गया।
दोनों बिल्लियाँ शर्मिंदा हो गईं।
रीना ने धीरे से कहा, “काश हमने आपस में झगड़ा न किया होता।”
मीना बोली, “हाँ, मिलकर बाँट लेते तो अच्छा होता।”
दोनों ने सबक सीखा और दोस्ती बनाए रखने का फैसला किया।
सीख: आपसी झगड़े में हमेशा कोई तीसरा फायदा उठा लेता है। मिल-जुलकर रहना ही समझदारी है।
12.बुद्धिमान खरगोश और घमंडी शेर : Panchatantra Stories

एक घने जंगल में शेर रहता था। वह बहुत ही ताकतवर था। वह बहुत अहंकारी था। उसने बिना किसी कारण के जंगल में सभी जानवरों को डरा दिया और उसने कई गुणा शिकार किया। सभी जंगल के जानवर शेर से परेशान थे।
एक दिन सभी जानवरों ने मिलकर फैसला किया कि प्रतिदिन एक जानवर शेर के पास भेजा जाएगा ताकि उन्हें बचाया जा सके। कुछ दिनों तक इसी तरह चलता रहा । एक दिन छोटे से खरगोश को भेजा गया।
खरगोश बहुत देर से पहुंचा, शेर ने ( गुस्से से पूछा ) : तुम्हे इतनी देर क्यों हुई ?
फिर खरगोश ने शांतिपूर्वक कहा, “महाराज, मैंने अपने रास्ते में एक शेर से मिला। वह कह रहा था,उसने घोषित किया कि वह इस जंगल का नया बादशाह है।
यह कहकर खरगोश ने शेर को भड़काया और उस जगह ले गया, जहां एक गहरे कुएँ में उसका प्रतिबिंब ( छवि ) दिख रहा था , शेर परछाई देखने के लिए उधर झुका, उसने अपनी परछाई देखी और सोचा कि दूसरा शेर उसने उस परछाई के साथ लड़ने लगा और कुएं में छलांग मार दी , सभी जानवर खुश होने लगे। खरगोश ने अपनी बुद्धि का उपयोग कर सभी को बचा लिया |
सीख: बुद्धि, ताक़त से बड़ी होती है।
13.छोटी आदत, बड़ा बदलाव

बहुत समय पहले की बात है, हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे एक छोटे से गाँव “सूर्यमणि” में अर्जुन नाम का एक 10 साल का लड़का रहता था। अर्जुन बहुत होशियार था, लेकिन उसमें एक कमी थी—वह हमेशा ही अपने काम को टालता रहता। स्कूल का होमवर्क हो या घर के छोटे-छोटे काम, अर्जुन हमेशा कहता, “कल कर लूंगा,” और यह “कल” कभी आता ही नहीं था।
उसके माता-पिता समझाने की कोशिश करते है—
“अर्जुन, आदतें इंसान को बनाती या बिगाड़ती हैं।”
पर अर्जुन हँसकर बात टाल देता।
एक सुबह स्कूल में उसके शिक्षक, श्री वर्मा जी, बच्चों को आदतों पर एक कहानी सुना रहे थे। उन्होंने कहा,
“बुरी आदतें पेड़ की जड़ों जैसी होती हैं। जब वे छोटी होती हैं तो आसानी से उखाड़ी जा सकती हैं, लेकिन जब गहरी जड़ पकड़ लेती हैं, तब उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है।”
अर्जुन ने कहानी सुनी, पर उसे लगा कि यह तो सिर्फ बच्चों की कहानियां ( Bacchon ki kahaniyan) है।
उसी दिन स्कूल से लौटते समय अर्जुन ने देखा कि रास्ते पर एक छोटी-सी कांटेदार झाड़ी उगी थी। उसने सोचा कि रास्ता तो चौड़ा है, एक छोटी-सी झाड़ी से क्या फर्क पड़ेगा। वह उसे हटाने के बारे में सोचता भी नहीं। अगले कुछ हफ्तों में झाड़ी थोड़ी और बड़ी हो गई। अब कांटे दिखने लगे थे, लेकिन अर्जुन रोज़ उसे देखकर भी अनदेखा कर देता।
एक दिन गाँव के बुजुर्ग रमेश काका उसी रास्ते पर चल रहे थे और झाड़ी के तेज कांटों में उनका पैर लग गया। वे जोर से चिल्लाए। अर्जुन तुरंत उनकी मदद के लिए दौड़ा।
“काका, आप ठीक हैं?”
रमेश काका बोले, “मैं ठीक हूँ बेटा… पर देखो, जब यह झाड़ी छोटी थी, तब कोई इसे आसानी से निकाल सकता था। अब देखो कैसे दर्द दे रही है।”
अर्जुन को शिक्षक की बात याद आ गई—“छोटी बुरी आदतें भी ऐसी ही होती हैं।”
उस रात अर्जुन देर तक सोचता रहा। उसे जो होमवर्क मिला था उसके बारे में सोचना शुरू किया वह पहली बार खुद से कहा,
“नहीं, आज ये काम अभी करूँगा, कल पर नहीं छोड़ूँगा”
अगले दिन उसने जल्दी उठने की आदत शुरू की। पहले दिन मुश्किल हुई, पर उसने थोड़ा-सा प्रयास किया। हर दिन वह एक छोटी-सी अच्छी आदत जोड़ता—
• जल्दी उठना
• होमवर्क समय पर करना
• कमरा साफ रखना
• स्कूल की तैयारी रात को ही करना
• माँ की मदद करना
पहले-पहल मुश्किलें आईं, लेकिन धीरे-धीरे समय पर काम करने से उसे अच्छा लगने लगा। उसे महसूस हुआ कि उसके पास खेलने के लिए भी अधिक समय बचने लगा है।
एक सप्ताह बाद अर्जुन उसी रास्ते से गुज़रा और उसने देखा कि झाड़ी अब बहुत बड़ी हो चुकी थी। उसने तय किया कि आज इसे जड़ से निकाल दूँगा। उसने गाँव वालों की मदद ली। सबने मिलकर जोर लगाया, तभी जाकर झाड़ी उखड़ी।
कुछ महीनों में अर्जुन की नई आदतों ने उसका जीवन बदल दिया।
• वह कक्षा में समय पर आने लगा।
• पढ़ाई में उसके नंबर बढ़ गए।
• शिक्षक उसकी तारीफ करने लगे।
• घरवाले भी खुश थे कि अर्जुन जिम्मेदार बन रहा है।
यह बदलाव देखकर उसके दोस्तों ने कहा,
“तुम, तू तो पूरी तरह बदल गया!”
अर्जुन ने हँसकर कहा,
“छोटी-छोटी आदतें बहुत बड़ा जादू करती हैं।”
कहानी से सीख :
अर्जुन ने हमें एक बड़ी सीख दी है। अच्छी आदतें धीरे-धीरे जोड़ो और बुरी आदतों को शुरुआत में ही रोक दो, नहीं तो वे कांटेदार झाड़ियों की तरह आगे चल कर दर्द और पछतावा ही होता है !
इसे भी पढ़ें : बीरबल की बुद्धिमानी के 10 शानदार किस्से – Hindi Stories
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In life come failure and success both we have to look what “we learn from failure and how i succeed and the path distance from failure to success”
Papu Gentleman