कौन होगा अगले दौर का राजा?
जब तीनों युवराज एक साथ घुड़सवारी की कठिन प्रतियोगिता को पूरा कर लेते हैं, तब प्रजा और राजा के मन में एक ही सवाल रहता है अब अगला राजा कौन बनेगा? क्या कोई दूसरा रास्ता है जिससे असली हकदार का फैसला हो सके? पढ़िए यह रोमांचक और मज़ेदार हिंदी कहानी (Short Hindi Stories) , जिसमें बुद्धिमानी, चालाकी और राजगद्दी की दिलचस्प परीक्षा छिपी है।
अगला राजा कौन? : Hindi Stories with Moral

राजा और रानी अपनी प्रजा के साथ बहुत खुश रहते थे ,
राजा हमेशा यही कहते हमारी प्रजा में सभी को खुश रहना चाहिए । चाहे वह मनुष्य हो या जीव जंतु या फिर पेड़ या पौधे हो ।
मगर सभी को यही चिंता सताती थी , हमारा होने वाला राजा कौन बनेगा क्योंकि हमारे राजा और रानी की कोई संतान नहीं थी ।
अगले वर्ष ही , रानी साहिबा ने एक पुत्र को जन्म दिया , जिनका नाम “सुयशेश” था , हर जगह खुशी का माहौल था , सब खुश थे हर जगह ढोल पीटे जा रहे थे उत्सव और जलसा बनाया जा रहा था ।
मगर वह सभी इस बात से अंजान थे कि यह खुशी का माहौल फिर अगले साल आने वाला था ।
रानी साहिबा ने फिर एक पुत्र को जन्म दिया जिनका नाम ” शिवमिशेष ” था , उसके फिर अगले साल अपने तीसरे पुत्र को जन्म दिया जिनका नाम ” शिवांश ” था ।
धीरे धीरे समय बिता और सभी युवराजों को विद्या , घुड़सवारी , तलवारबाजी ये सब का ज्ञान बोध कराया गया ।
कुछ वर्षों बाद रानी साहिबा ने सुंदर सी पुत्री को जन्म दिया जिनका नाम ” सायेशा ” रखा गया ।
राज्य में सभी खुश थे , मगर कुछ वर्ष पश्चात् राजा साहब की सेहत में बदलाब आया उनकी सेहत , हर दिन बिगड़ती रहती ।
राजा साहब ने अपने शाही मंत्री को बुलाया और कहा अब समय आ गया है युवराजों में से कोई एक अब राज गद्दी को संभाले ।
मंत्री : राजा साहब इतनी क्या जल्दी है ? ,
जब मंत्री ने राजा साहब को गौर। से देखा तो , वह बूढ़े हो रहे थे यही सही समय है ।
मंत्री : महाराज प्रथा के अनुसार तो आपके बड़े बेटे ” सुयशेश ” ही राजा बनेंगे !
राजा : पहले की बात अलग थी , अब वही राजा बनेगा जो इसके योग्य होगा ,
सभी युवराज को अगले दिन एकत्रित किया गया,
राजा साहब ने कहा : आप में से जो कोई भी योग्य होगा वही राजा के सरताज का हकदार होगा ।
सभी के लिए घुड़सवारी की प्रतियोगिता रखी गई , जो भी पहाड़ के उस विशाल बरगद के पेड़ को सबसे पहले छू कर वापस आयेगा वो युवराज अगला होने वाला राजा कहलाएगा ।

सभी प्रजा ने खुशियां और ढोल नगाड़े से इस प्रतियोगिता की शुरुआत की ।
सुयशेश , शिवमिशेष और शिवांश तीनों युवराज ने अपने घोड़े पे लगाम लगाई , और घुड़सवारी शुरू की
यह देख सारी प्रजा शाबाश ! शाबाश कह कर तीनों युबराजों के लिए हौसला बढ़ाया ,
सुयशेश , शिवमिशेष और शिवांश ने एक साथ यह प्रतियोगिता खत्म की यह कहना मुश्किल था कि कौन इस प्रतियोगिता का विजेता है ।
राजा और रानी ने आपस में फैसला कर कहा :अब आप लोग कुछ ऐसा प्रदर्शन करे जिससे प्रजा और हमारा दिल जीतने की कोशिश करे ।
तीनों युवराजों ने एक – दूसरे को देखा और मुस्कुराए और मन ही मन सोचा ना जाने बड़े भाई , छोटे भाई किया प्रदर्शन दिखाएंगे ।
पहले युवराज सुयशेश ने भाला उठाया , और बरगद के पेड़ को देखा और उसकी तरफ घोड़े की लगाम तेज की और उसके पास जाने लगा ,
आप कर सकते है युवराज , शाबास! शाबाश यह कह कर प्रजा ने हौसला दिया
वह बरगद के विशाल पेड़ के बीचों-बीच से होकर निकल गए।,
सभी ने यही कहा यह तो सिर्फ हमारे सुयशेश युवराज ही
कर सकते है ।
अब बारी थी शिवमिशेष युवराज की , उन्होंने भी घोड़े पे बैठ उस बरगद के पेड़ को देखा और उसकी तरफ बढ़ने लगे , सब यह सोच रहे थे ।
युवराज कौन सा प्रदर्शन करने वाले है , सभी प्रजा ने कहा आप कर सकते है युवराज !
शिवमिशेष वीर युवराज ने घोड़े सहित उस विशाल बरगद के पेड़ को एक ही छलांग में पार कर दिया।
जो कि कबीले तारीफ प्रदर्शन था ।
अब बारी थी शिवांश युवराज की , उन्होंने भी घोड़े पर बैठ उस बरगद के पेड़ को देखा और उसके पास गए और उस विशाल बरगद के पेड़ को एक ही झटके में जड़ से उखाड़ फेंका ।
अब बारी थी आखरी फैसले की कौन राजा बनेगा।
बरगद के विशाल पेड़ के बीचों-बीच से पार होकर निकलने वाला ?
घोड़े सहित उस विशाल बरगद को एक ही छलांग में पार करने वाला ?
विशाल बरगद के पेड़ को एक ही झटके में जड़ से उखाड़ फेंकना वाला ?
सभी प्रजा युवराज शिवांश की बाते कर रहे थे , वह कितने बड़े शक्तिशाली है एक ही झटके में बरगद के पेड़ को जड़ से उखाड़ फेंका वह अगर राजा बनते है तो अवश्य हमारी प्रजा हमेशा खुशी रहेगी और हम किसी भी राज्य से युद्ध में विजय प्राप्त कर सकते है ।
तभी राजा घोषणा करते है आप सभी शांत हो जाए ।
तभी सायेशा रोने लगती है और जोड़ से चिल्लाने लगते कि क्या वह बरगद के पेड़ मर गया है ?
वह दौड़ कर उस बरगद के पेड़ के पास जाती है और कहती है इससे भाले से चोट लगी है, और रोने लगी ।
जो पंछिया थी वह अपने घोंसले को ढूंढ रही थी , और आकाश में एकत्रित हों गए ।
तभी राजा और रानी ने आपस में कुछ देर तक बात की और कहा कि इस प्रतिज्ञियता में हम सभी भूल गए थे कि हमारे राज्य में हर किसी को खुश रहना चाहिए वह चाहे पेड़ , पौधे हो या मनुष्य या जीव जंतु, मगर हमारी इस 7 साल की पुत्री ने हम सब को फिर से यह अहसा कराया ।
वह अच्छी तरह से इन सभी को परवाह करती है और इनका ख्याल रखती है ,वह इन सभी का दर्द समझती है।

राजा ने पहले अपने तीनों बेटों को देखा फिर बेटी को देखा ।
राजा ने कहा : एक अच्छा राजा वही हो सकता है , जो सभी का ख्याल रखे ।
आने वाले समय में हमारी पुत्री ” सायेशा” ही राज्य संभलेगी और ” सायेशा ” को रानी घोषित किया गया “।
सब ने मुड़कर उस छोटी बच्ची को देखा जो उनकी होने वाली रानी थी ।
सायेशा उस बरगद के पेड़ के पास खड़ी थी , वह मानो एक नन्हा सा बरगद को पेड़ लग रही हो।
उनके चारों तरफ पंछी फड़फड़ा रहे थे कुछ उड़ कर उसके सिर पर आ कर बैठ गए तो , कुछ पंछी ” सायेशा ” के कंधों पे बैठ जाती है, उसने अपने छोटे हाथों को फैलाए और पंछी आ कर बैठ गए ।
यह कहानी यहां तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद !
Source of this amazing story : NCERT.NIC.IN
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निष्कर्ष :
दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपको ” अगला राजा कौन? : Short Hindi Stories with Moral ” शीर्षक वाली यह हिंदी प्रेरणादायक कहानी, पसंद आई होगी , ऐसी और भी “प्रेरणादायक कहानियाँ “, ” छोटी कहानियाँ ( Chhoti Kahaniyan),” ,”Short Stories in Hindi”.” Short Hindi Stories for Kids” की कहानी पढ़ने के लिए, हमारे ब्लॉग www.Sagadoor.in पर बने रहे , धन्यवाद !